मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर चल रहा धरना मंगलवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य सेवा सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने बरेली में लखनऊ जा रहे स्वास्थ्य कर्मियों को कथित रूप से रोके जाने की घटना पर नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

धरना स्थल पर कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच भारतीय मजदूर संघ समेत कई कर्मचारी संगठनों ने धरने को समर्थन दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने के बावजूद संविदा कर्मियों को नियमितीकरण, वेतन और सेवा सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

लखनऊ जा रहे कर्मचारियों को बरेली में रोकने का आरोप
एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने आरोप लगाया कि 11 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर से जा रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की बस को बरेली के फतेहगंज क्षेत्र में रोक लिया गया था। उनके मुताबिक, कर्मचारियों को थाने ले जाकर करीब 16 घंटे तक रोके रखा गया।
डॉ. जैन ने यह भी आरोप लगाया कि रात के दौरान कर्मचारियों के मोबाइल फोन अपने पास रख लिए गए, जिससे वे अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर सके। उनका कहना है कि कर्मचारियों को वापस जाने की अनुमति नहीं मिलने और परिवार से बातचीत नहीं हो पाने के कारण उन्होंने थाने के बाहर विरोध जताया। बाद में मुजफ्फरनगर पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद बस पुलिस की निगरानी में वापस लौट सकी।
कर्मचारी संगठन ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कर्मचारी अपनी सेवा संबंधी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। ऐसे में उन्हें रास्ते में रोकने और परिजनों से संपर्क नहीं करने देने के आरोप गंभीर हैं। हालांकि, इस मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने की जानकारी नहीं दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ वार्ता में नहीं निकला समाधान
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर की 12 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और मिशन निदेशक के साथ बैठक हुई थी। इस वार्ता में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों पर चर्चा हुई, लेकिन कर्मचारियों का दावा है कि उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।
इसके बाद लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया। मुजफ्फरनगर में भी कर्मचारियों ने स्थानीय स्तर पर आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा के मुद्दों पर अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।
कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि जब तक मांगों को लेकर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त करने का सवाल नहीं उठता।
भारतीय मजदूर संघ ने दिया समर्थन, चक्का जाम की चेतावनी
धरना स्थल पर पहुंचे भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य केके शर्मा ने एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संविदा कर्मियों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई की गई, तो भारतीय मजदूर संघ पूरे जिले में चक्का जाम करने के लिए बाध्य होगा।
इसके अलावा कई अन्य कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। समर्थन देने पहुंचे संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए और उनकी सेवा संबंधी मांगों पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
बड़ी संख्या में कर्मचारी धरने में शामिल
धरने में जिलाध्यक्ष डॉ. सचिन जैन के साथ डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. अंजू, डॉ. सुदेश, डॉ. सुधा, प्रियंका, प्रीति, गीता शर्मा, वैशाली शर्मा, ज्योति गुप्ता, प्रियंका शर्मा, प्रमिला, अलका शर्मा, अमृता शर्मा, नुसरत, मदन, डॉ. शमशेर, अश्विनी, जुनैद, अनिल कुमार, कामेश, विपुल, गौरव, पंकज, सूर्य प्रकाश, धर्मेंद्र, सलीम, अरुण मावी, विकल, डॉ. चेतन और डॉ. शरद सहित बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
धरने में शामिल कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य सेवा सुविधाओं से संबंधित मांगों पर ठोस निर्णय होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल मुजफ्फरनगर में सीएमओ कार्यालय पर धरना जारी है, जबकि बरेली में कर्मचारियों को रोके जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बन गई है।

