मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने संविदा कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मचारी एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन समेत विभिन्न मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की गई।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि एनएचएम के तहत कार्यरत कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और वेतन संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।

नियमितीकरण और सम्मानजनक वेतन की मांग
ज्ञापन सौंपते समय संगठन के महामंत्री मणिकांत त्यागी और कोषाध्यक्ष डॉ. फैजल बिन मंसूर ने कहा कि संविदा कर्मचारियों ने वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने सरकार से संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने की मांग की।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कर्मचारियों के मानदेय में पर्याप्त वृद्धि कर उन्हें सम्मानजनक वेतन दिया जाए। इसके साथ ही सभी एनएचएम कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, ईपीएफ, मकान किराया भत्ता और ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग भी उठाई गई।
कर्मचारियों और आश्रितों के लिए कैशलेस इलाज की मांग
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर डॉ. राहुल वर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से आम लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था की गई है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालने वाले एनएचएम कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए कम से कम दस लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को भी बेहतर चिकित्सा सुरक्षा मिलनी चाहिए।
अंतर-जनपदीय स्थानांतरण और अनुकंपा नियुक्ति की मांग
मीडिया प्रभारी रवि धीमन और महिला संगठन मंत्री निर्मला देवी ने कहा कि कम मानदेय में कर्मचारियों के लिए दूसरे जिलों में रहकर नौकरी करना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एनएचएम कर्मचारियों को अंतर-जनपदीय स्थानांतरण की सुविधा दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाए, ताकि परिवार को आर्थिक संकट से बचाया जा सके।
एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शमशेर ने आउटसोर्स कर्मचारियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करने की मांग उठाई। वहीं लैब टेक्नीशियन कामेश ने नियमित भर्तियों में एनएचएम कर्मचारियों के लिए 25 प्रतिशत पदों का कोटा निर्धारित करने की मांग रखी।
स्वास्थ्य सेवाओं में एनएचएम कर्मचारियों की बड़ी भूमिका
डॉ. सुदेश वर्मा और डाइटिशियन नेहा त्यागी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में मानव संसाधन एनएचएम के माध्यम से कार्यरत हैं। उनके अनुसार, ये कर्मचारी दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर अब गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि लगातार मांग उठाने के बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
8 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
एनएचएम कर्मचारी संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी 8, 9 और 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर पूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 12 अक्टूबर को लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय पर बड़े स्तर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से आंदोलन की स्थिति आने से पहले कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान निकालने की अपील की।
बड़ी संख्या में कर्मचारी रहे मौजूद
धरना और प्रदर्शन के दौरान डॉ. सचिन जैन, डॉ. शमशेर, डॉ. राहुल वर्मा, मणिकांत त्यागी, डॉ. फैजल बिन मंसूर, रवि धीमन, निर्मला देवी, नेहा त्यागी, कामेश, निर्मल चौधरी, ओम कुमार, रविंद्र कुमार, एहतेशाम, राकेश कुमार, विपुल कुमार, डॉ. रुचि नारंग, डॉ. राकेश बंसल, डॉ. सागर गोस्वामी, सचिन कुमार, तंजीम अहमद, मदन कुमार, लवलेश कुमार, बबीता, अनिल कुमार, संजय कुमार, रवि कुमार, अश्वनी कुमार, आकाश कुमार, मोहित कुमार, शोभित कुमार, प्रवीण कुमार पाल सहित बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मचारी मौजूद रहे।

