मुजफ्फरनगर। शहर से सटे ग्राम शेरपुर में सरकारी जोहड़ की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और विकास कार्यों के लिए जारी सरकारी धनराशि में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। गांव निवासी हमीदुल्ला पुत्र याहिया ने बुधवार को मुजफ्फरनगर मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता कर ग्राम प्रधान शुऐब पुत्र गनी नम्बरदार समेत पांच लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायतकर्ता का दावा है कि जोहड़ की 9 बीघा 12 बिस्से जमीन पर 50 से 60 पक्के मकान बना दिए गए और इनके निर्माण के नाम पर कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूली गई।

हमीदुल्ला ने ग्राम प्रधान शुऐब के अलावा वाकिब, सद्दाम, शावेज और साकिब की भूमिका की जांच कराने की मांग की। उन्होंने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों और विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने, कथित अवैध कब्जे हटवाने तथा आरोप सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई। ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

खसरा संख्या 664 में दर्ज है जोहड़ की जमीन
पत्रकार वार्ता में हमीदुल्ला ने बताया कि ग्राम शेरपुर, परगना और तहसील सदर की खसरा संख्या 664 राजस्व अभिलेखों और गांव के शजरे में जोहड़ यानी तालाब के रूप में दर्ज है। उनका कहना है कि यह सार्वजनिक जलस्रोत चकबंदी से पहले से मौजूद है और उनकी कृषि भूमि भी इसके पास स्थित है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकारी अभिलेखों में जोहड़ के रूप में दर्ज जमीन पर पक्के मकान बना दिए गए हैं। इससे ग्राम समाज की संपत्ति और सार्वजनिक जलस्रोत के अस्तित्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि संबंधित जमीन की राजस्व अभिलेखों के आधार पर पैमाइश कराई जाए और मौके पर मौजूद सभी निर्माणों की स्थिति का सत्यापन किया जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी जमीन पर निर्माण किस आधार पर हुए और क्या इसके लिए किसी विभाग से अनुमति ली गई थी। उनके मुताबिक, निष्पक्ष जांच से ही जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सफाई और चारदीवारी के बजट में गड़बड़ी का आरोप
हमीदुल्ला ने वर्ष 2021 से 2026 के बीच जोहड़ की सफाई और उसके चारों ओर पक्की चारदीवारी के निर्माण के लिए जारी सरकारी धनराशि में भी कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनका दावा है कि संबंधित कार्यों के लिए बजट आने के बावजूद मौके पर न तो समुचित सफाई कराई गई और न ही चारदीवारी का निर्माण हुआ।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कागजों में काम पूरा दर्शाकर कथित तौर पर फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए गए तथा सरकारी धनराशि का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने ग्राम प्रधान शुऐब और अन्य नामजद व्यक्तियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की।
हमीदुल्ला के मुताबिक, संबंधित अवधि में जोहड़ के लिए स्वीकृत बजट, भुगतान का विवरण, बिल-वाउचर और निर्माण कार्यों के अभिलेखों की जांच होनी चाहिए। हालांकि, सरकारी धन के गबन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
50 से 60 मकानों और 10 करोड़ रुपये की कथित वसूली की जांच की मांग
मामले में शिकायतकर्ता ने दावा किया कि जोहड़ की जमीन पर 50 से 60 पक्के मकान बनवाए गए हैं और निर्माण के नाम पर लोगों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम कथित तौर पर वसूली गई है। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक निर्माण की अलग-अलग जांच कर यह पता लगाया जाए कि जमीन पर किस आधार पर मकान बनाए गए और किसी प्रकार का लेन-देन हुआ है या नहीं।
हमीदुल्ला ने प्रशासन से कथित वसूली से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की। हालांकि, पत्रकार वार्ता में कथित 10 करोड़ रुपये की वसूली के दावे की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले विस्तृत वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने आने की जानकारी नहीं दी गई। इसलिए रकम और आरोपितों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अधिकारियों को शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप
हमीदुल्ला ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस मामले में एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर और अन्य संबंधित अधिकारियों को पहले भी लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने मांग की कि राजस्व विभाग और विकास विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर जांच कराई जाए। साथ ही जमीन की पैमाइश, निर्माणों का विवरण और सरकारी धनराशि के खर्च का भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने जांच के दौरान मौके की वीडियोग्राफी कराने की मांग भी उठाई, ताकि जमीन की मौजूदा स्थिति का रिकॉर्ड तैयार हो सके।
परिवार को धमकी मिलने का भी दावा
पत्रकार वार्ता के दौरान हमीदुल्ला ने आरोप लगाया कि सरकारी जोहड़ की जमीन पर कथित कब्जे और विकास कार्यों में अनियमितताओं का मामला उठाने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकियां मिल रही हैं। उनका दावा है कि उन्हें परिवार सहित जिंदा दफन कराने की धमकी दी गई है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से अपनी तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने और धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हमीदुल्ला ने बताया कि उन्होंने 21 अक्टूबर 2026 को मामले से संबंधित शिकायत की प्रतियां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुजफ्फरनगर के मुख्य विकास अधिकारी को भी भेजी थीं। पत्रकार वार्ता में उनके साथ अहसान उलहक भी मौजूद रहे।
जोहड़ को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की कि खसरा संख्या 664 की जमीन की पैमाइश कराकर कथित अवैध कब्जों की पहचान की जाए। इसके साथ ही वर्ष 2021 से 2026 तक जोहड़ के विकास के लिए जारी धनराशि और किए गए खर्च की जांच कराई जाए।
हमीदुल्ला ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्राम प्रधान शुऐब पुत्र गनी नम्बरदार, वाकिब, सद्दाम, शावेज और साकिब के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने जोहड़ की जमीन से अवैध कब्जे हटवाकर सार्वजनिक जलस्रोत को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग भी की।
अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन पर कब्जे, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और अवैध वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
