मुजफ्फरनगर। सनातन धर्म सभा से जुड़े विवादित प्रकरण में सुनवाई के बाद दाखिल किए गए रिजॉइनर से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सहायक रजिस्ट्रार सोसाइटी, फर्म्स एवं चिट्स सहारनपुर के समक्ष हुई सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से अधिवक्ताओं ने अपने अपने तर्क रखे। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई। अब मामले में प्रशासनिक स्तर से अंतिम निर्णय को लेकर संस्था से जुड़े लोगों और शहरवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

सुनवाई में सनातन धर्म सभा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखदेव मित्तल ने संस्था का पक्ष रखा। वहीं शिकायतकर्ता और संस्था के आजीवन सदस्य अनुराग अग्रवाल की ओर से आयकर अधिवक्ता अमित गर्ग ने पैरवी करते हुए शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से विभिन्न बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा।

शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से दाखिल किए गए रिजॉइनर में संस्था के बायलॉज के क्लॉज 14 का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि मौजूदा प्रबंध समिति का तीन वर्षीय कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो चुका है। ऐसे में संस्था में नियमानुसार चुनाव कराकर नई प्रबंध समिति का गठन किए जाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाना संस्था की लोकतांत्रिक और वैधानिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
रिजॉइनर में 30 जुलाई 2026 को पारित आदेश का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष ने मांग की है कि उक्त आदेश को प्रभावी रखते हुए चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू कराई जाए। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार सुनवाई के दौरान सहायक रजिस्ट्रार की ओर से भी चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को लेकर सकारात्मक रुख सामने आया और जल्द चुनाव कराने की बात कही गई।
मामले में केवल चुनाव का मुद्दा ही नहीं, बल्कि संस्था के वित्तीय अभिलेखों की जांच का विषय भी अहम बना हुआ है। रिजॉइनर में आरोप लगाया गया है कि 30 जुलाई 2026 के आदेश के तहत संस्था के पिछले पांच वर्षों के खातों की जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज दस दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि निर्धारित समय बीतने के बावजूद चार्टर्ड अकाउंटेंट को आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
शिकायतकर्ता अनुराग अग्रवाल ने संस्था की दुकानों के हस्तांतरण से जुड़े मामले को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि संस्था की ओर से सहायक रजिस्ट्रार के समक्ष यह कहा गया कि कोई दुकान ट्रांसफर नहीं की गई है। वहीं अनुराग अग्रवाल का आरोप है कि संस्था के वार्षिक अधिवेशन में पूर्व मंत्री सतीश गर्ग और सुखदेव मित्तल की ओर से दुकानों के हस्तांतरण से प्राप्त रकम का उल्लेख किया गया था और रकम को आलमारी में रखे होने की बात कही गई थी।
शिकायतकर्ता पक्ष ने इसी कथित विरोधाभास को आधार बनाते हुए संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संस्था के रिकॉर्ड और पूर्व में कही गई बातों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दूसरी ओर, मामले में संस्था का पक्ष भी सुनवाई के दौरान रखा गया है और अंतिम स्थिति प्रशासनिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल विवाद से जुड़े विभिन्न दावों और आरोपों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों तथा जांच के आधार पर होना बाकी है।
सनातन धर्म सभा से जुड़े इस विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रबंध समिति के चुनाव, वित्तीय अभिलेखों की जांच और दुकानों के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों को लेकर है। प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई से इन मुद्दों की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अब संबंधित पक्ष प्रशासनिक निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। संस्था के चुनाव को लेकर उठी मांग और वित्तीय जांच में कथित देरी के आरोपों के बीच आने वाला निर्णय सनातन धर्म सभा की आगे की व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है और सभी की नजरें सहायक रजिस्ट्रार के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।

