मुजफ्फरनगर में ‘संविधान हत्या दिवस’ पर श्रद्धांजलि सभा: आपातकाल के संघर्ष को याद कर लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प, सामोद कुमार दिवाकर ने बताया काला अध्याय

मुजफ्फरनगर में ‘संविधान हत्या दिवस’ पर श्रद्धांजलि सभा: आपातकाल के संघर्ष को याद कर लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प, सामोद कुमार दिवाकर ने बताया काला अध्याय

मुजफ्फरनगर। 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को याद करते हुए गुरुवार को ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर जिले में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के MLC विधायक व विधान परिषद के सदस्य मा. डॉ. सुरेंद्र चौधरी तथा SC मोर्चा जिला कार्यालय प्रभारी व मा. डॉ. सुरेंद्र चौधरी के प्रतिनिधि सामोद कुमार दिवाकर सहित अन्य पदाधिकारियों ने आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को नमन किया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का एक अत्यंत संवेदनशील और विवादास्पद कालखंड बताते हुए कहा कि यह समय संविधान और नागरिक अधिकारों की गंभीर परीक्षा का दौर था। इस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए थे।

 

सामोद कुमार दिवाकर ने अपने संबोधन में कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारत के इतिहास का वह अध्याय है, जिसे लोकतंत्र के लिए चेतावनी के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया था और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास हुए थे। ऐसे समय में कई लोगों ने साहस और धैर्य के साथ संविधान की भावना को जीवित रखने का कार्य किया।

 

वक्ताओं ने यह भी कहा कि संविधान के आदर्श न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व ही देश की मजबूती का आधार हैं, और इन्हीं मूल्यों को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।

 

इसी अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में भी ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के माध्यम से आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों और उनके लोकतंत्र पर पड़े प्रभावों को याद किया जा रहा है।

 

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र को गहरा आघात पहुंचाया था, जिसे इतिहास में एक ‘काला अध्याय’ माना जाता है। वहीं, 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद देश ने पुनः लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती से अपनाया।

 

कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और अंत में सभी ने संविधान की रक्षा और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया।

 

 

 

 

 

 

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