मुजफ्फरनगर। जिले में शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने, स्टॉक में गड़बड़ी और नियमों के विपरीत बिक्री की शिकायतों पर लगाम लगाने के लिए आबकारी विभाग ने व्यापक जांच अभियान चलाया। अपर मुख्य सचिव आबकारी और आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश प्रयागराज के निर्देशों के क्रम में चलाए गए इस अभियान में जिले की अलग अलग मदिरा दुकानों पर अचानक पहुंचकर जांच की गई।

अभियान मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाया गया। जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी निरीक्षकों की अलग अलग टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में स्थित शराब की दुकानों का निरीक्षण किया। आबकारी विभाग की टीमों के अचानक पहुंचने से दुकानदारों में हड़कंप की स्थिति रही।

जांच के दौरान अधिकारियों ने दुकानों पर उपलब्ध शराब के भौतिक स्टॉक का मिलान सरकारी अभिलेखों में दर्ज स्टॉक से किया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और दुकान में मौजूद शराब की बोतलों की संख्या में कोई अंतर तो नहीं है। स्टॉक में किसी तरह की कमी या अधिकता मिलने पर उसके कारणों की पड़ताल की गई।
पॉश मशीन से बिक्री की भी जांच
आबकारी अधिकारियों ने शराब की दुकानों पर बिक्री व्यवस्था की भी गहन जांच की। टीमों ने यह सुनिश्चित किया कि दुकानदारों द्वारा मदिरा की बिक्री पॉश मशीन के माध्यम से ही की जा रही है या नहीं। अधिकारियों ने दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक बिक्री निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाए और नियमों की अनदेखी न की जाए।
विभाग का मुख्य उद्देश्य शराब की बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखना और बिना बिल या आबकारी नियमों के विपरीत होने वाली बिक्री पर रोक लगाना है। अधिकारियों ने दुकानदारों को चेतावनी दी कि बिक्री प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ओवररेटिंग पकड़ने के लिए कराया गोपनीय टेस्ट परचेज
शराब की दुकानों पर ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूलने की शिकायतों को देखते हुए आबकारी विभाग ने गोपनीय टेस्ट परचेज भी कराया। इस प्रक्रिया के जरिए अधिकारियों ने यह जांचने का प्रयास किया कि दुकानों पर शराब निर्धारित मूल्य पर ही बेची जा रही है या ग्राहकों से अधिक रकम वसूली जा रही है।
टेस्ट परचेज की कार्रवाई को गोपनीय रखा गया, ताकि दुकानदारों को इसकी पहले से जानकारी न हो सके। इसका उद्देश्य दुकानों पर वास्तविक बिक्री व्यवस्था की स्थिति का पता लगाना और ओवररेटिंग की शिकायतों की जांच करना था।
जांच के दौरान अधिकारियों ने स्टॉक के सत्यापन के साथ बिक्री प्रक्रिया और दुकानों में नियमों के पालन की भी निगरानी की। विभाग की ओर से दुकानदारों को निर्देश दिए गए कि लाइसेंस की शर्तों और आबकारी नियमों के अनुसार ही शराब की बिक्री की जाए।
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
आबकारी विभाग ने साफ किया है कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने या बिक्री में किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दुकानदारों को निर्देश दिया गया है कि ग्राहकों से तय मूल्य से अधिक रकम न ली जाए और बिक्री प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी शराब की दुकान पर निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूली जाती है या बिक्री में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है तो इसकी शिकायत की जाए। उपभोक्ता जन शिकायत ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत आबकारी विभाग तक पहुंचा सकते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक जिले में शराब की दुकानों की जांच का अभियान आगे भी जारी रह सकता है। आबकारी विभाग का उद्देश्य दुकानों पर नियमों के पालन की निगरानी करने, ओवररेटिंग पर प्रभावी रोक लगाने और उपभोक्ताओं को निर्धारित मूल्य पर मदिरा उपलब्ध कराना है।

