मुजफ्फरनगर। अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों के साथ कथित अत्याचार, शोषण और हत्याओं की घटनाओं के विरोध में भारतीय अति पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा ने रविवार को मुजफ्फरनगर में चौथा लट्ठ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। टाउन हॉल स्थित संगठन के कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने विधि-विधान के साथ लट्ठों का पूजन किया। इस दौरान उन्होंने लट्ठों पर कलावा बांधा और तिलक लगाकर समाज के मान-सम्मान, सुरक्षा तथा हक-अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं को लट्ठ सौंपते हुए अन्याय और शोषण के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों के साथ हुई कथित घटनाओं और हत्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए संगठित प्रयास करने होंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अन्याय नहीं करेंगे और न ही किसी पर अत्याचार बर्दाश्त करेंगे: मोहन प्रजापति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज में किसी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि लोगों को अपने अधिकारों और सम्मान के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाया कि वे स्वयं किसी के साथ अन्याय या अत्याचार नहीं करेंगे और न ही किसी दूसरे व्यक्ति के साथ होने वाले शोषण को बर्दाश्त करेंगे।
उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा, संविधान की रक्षा और समाज के मान-सम्मान के लिए सभी को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। यदि किसी कमजोर व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव होता है तो उसके खिलाफ आवाज उठाना प्रत्येक जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है।
मोहन प्रजापति ने कहा कि लट्ठ पूजन केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से समाज को एकजुटता, आत्मसम्मान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संदेश दिया जाता है। समाज के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी होगी।
योगी सरकार पर लगाए भेदभाव के आरोप, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
मोहन प्रजापति ने प्रदेश की योगी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों के साथ होने वाली घटनाओं में अपेक्षित न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कमजोर वर्गों के लोगों के साथ मारपीट, शोषण और गंभीर आपराधिक घटनाओं के मामले सामने आ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में जातिगत भेदभाव दिखाई देता है। उनका कहना था कि जब किसी अपराध का आरोपी अति पिछड़े, दलित या मुस्लिम समाज से जुड़ा होता है तो बुलडोजर और एनकाउंटर जैसी सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है, जबकि प्रभावशाली और दबंग वर्गों से जुड़े आरोपियों के मामलों में कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि अपराध करने वाला व्यक्ति किसी भी जाति या धर्म का हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार समान और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। कानून व्यवस्था में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में अति पिछड़े समाज की अहम भूमिका का दावा
मोहन प्रजापति ने कहा कि अति पिछड़े समाज के लोगों ने भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समाज ने बेहतर सुरक्षा, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी की उम्मीद के साथ भाजपा का समर्थन किया था, लेकिन आज समाज के लोगों को अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर चिंता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह समाज के प्रत्येक वर्ग को समान सुरक्षा और न्याय उपलब्ध कराए। सरकार को उन लोगों की समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, जिन्होंने राजनीतिक रूप से उसका समर्थन किया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अति पिछड़ा समाज अब अपने साथ होने वाले कथित अत्याचार और शोषण को चुपचाप सहन नहीं करेगा। समाज अपने सम्मान, अधिकारों और सुरक्षा के लिए संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेगा।
आबादी के अनुपात में टिकट और राजनीतिक हिस्सेदारी देने की मांग
कार्यक्रम में राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। मोहन प्रजापति ने कहा कि भारतीय अति पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा किसी एक राजनीतिक दल से बंधा हुआ संगठन नहीं है। संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। इसके लिए संगठन किसी भी राजनीतिक दल के नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी मांगों को रख सकता है।
उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल अति पिछड़े और दलित समाज को उनकी आबादी के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और टिकट देने का काम करेगा, संगठन का झुकाव उसी दल की ओर रहेगा। राजनीतिक दलों को समाज को केवल चुनाव के समय वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उसे उचित राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को अपनी आबादी और सामाजिक भागीदारी के अनुरूप प्रतिनिधित्व पाने का अधिकार है। जब तक वंचित वर्गों को राजनीति और सत्ता में उचित भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान मुश्किल रहेगा।
एकजुटता के साथ संविधान की रक्षा का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर मोहन प्रजापति ने समाज के लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता, जागरूकता और संगठन होती है। अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठानी होगी।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि बहन-बेटियों की सुरक्षा, संविधान की रक्षा, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक अधिकारों के लिए लगातार काम करें। साथ ही किसी भी पीड़ित व्यक्ति की मदद के लिए आगे आएं और अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष करें।
चौथे लट्ठ पूजन कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय अति पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा ने समाज की एकजुटता, सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार तथा राजनीतिक दलों को अपनी मांगों से अवगत कराया। कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने समाज के मान-सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर काम करने का संकल्प लिया।

