मुजफ्फरनगर में मैदान से माफिया तक का सफर! सत्तू के काले कारनामों का खुलासा, पुलिस बोली- मासूम चीखों में तलाशता था सुकून

मुजफ्फरनगर में मैदान से माफिया तक का सफर! सत्तू के काले कारनामों का खुलासा, पुलिस बोली- मासूम चीखों में तलाशता था सुकून

मुजफ्फरनगर। कभी क्रिकेट के मैदान पर अपनी गेंदबाजी का हुनर दिखाने वाला और रणजी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाला सतपाल उर्फ सत्तू आखिरकार अपराध की उसी दुनिया में खत्म हुआ, जिसे उसने अपना साम्राज्य बना लिया था। पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए 65 वर्षीय कुख्यात अपराधी, सीरियल रेपिस्ट और छोटा राजन गैंग के शूटर सतपाल उर्फ सत्तू को लेकर जांच में ऐसे सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों तक को झकझोर कर रख दिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सत्तू सिर्फ एक अपराधी नहीं बल्कि विकृत मानसिकता वाला साइको सीरियल रेपिस्ट था, जो विशेष रूप से किशोर उम्र की लड़कियों को निशाना बनाता था। उसकी कार से बरामद सामान ने उसके अपराधों की भयावहता को और उजागर कर दिया है। पुलिस को वाहन से हथकड़ी, हंटरनुमा स्टिक, नशीला स्प्रे और अन्य संदिग्ध सामग्री मिली है, जिनका इस्तेमाल वह अपने शिकारों को काबू में रखने और प्रताड़ित करने के लिए करता था।

मासूम चीखों में तलाशता था सुकून

एसपी सिटी अमृत जैन के अनुसार सत्तू का अपराध करने का तरीका बेहद खौफनाक और अमानवीय था। वह पहले किशोरियों और युवतियों को नौकरी, इंटरव्यू या किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मिलवाने का झांसा देता था। परिवारों का विश्वास जीतने के बाद वह लड़कियों को अपने साथ ले जाता और रास्ते में उन्हें नशीले पदार्थों या अन्य तरीकों से अपने नियंत्रण में कर लेता था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि वह लड़कियों को हथकड़ी लगाकर कार में बंद कर देता था और फिर हंटर से बेरहमी से मारता-पीटता था। अधिकारियों के मुताबिक पीड़िताओं की चीखें और दर्द उसे मानसिक संतुष्टि प्रदान करते थे। यही वजह थी कि पुलिस उसे एक साइको सीरियल रेपिस्ट की श्रेणी में रख रही है।

क्रिकेटर से अपराधी बनने तक का सफर

सतपाल उर्फ सत्तू का जीवन कभी खेल जगत से जुड़ा हुआ था। उसने वर्ष 1996 में पंजाब की ओर से मोहाली और जालंधर में आयोजित रणजी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। वह भारतीय क्रिकेटर Yuvraj Singh के साथ भी मैदान साझा कर चुका था।

बताया जाता है कि उसके शुरुआती दिनों में पूर्व क्रिकेटर Yograj Singh भी उसके कोच रहे थे। लेकिन अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद उसका क्रिकेट करियर समाप्त हो गया। वर्ष 2001 में उसका नाम अपराधों में आने के बाद पंजाब क्रिकेट से जुड़े रिकॉर्ड से हटा दिया गया।

इसके बाद उसने राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 2007 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव जीतकर पार्षद भी बना। हालांकि उसका आपराधिक नेटवर्क लगातार फैलता गया और वह धीरे-धीरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत का बड़ा नाम बन गया।

मेरठ जेल से बना गैंगस्टर, छोटा राजन गैंग से जुड़ा

वर्ष 2010 में धागे से लदे ट्रक की लूट के मामले में गिरफ्तारी के बाद उसे मेरठ जेल भेजा गया। जेल में रहते हुए भी उसने क्रिकेट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और कई पुरस्कार जीते। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसने पूरी तरह अपराध की राह पकड़ ली।

पुलिस के मुताबिक उसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना गिरोह तैयार किया और बाद में कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन Chhota Rajan के नेटवर्क से जुड़कर सक्रिय शूटर के रूप में काम करने लगा। उसके खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में तीन राज्यों में दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

तकनीक से बचने के लिए अपनाता था अनोखे तरीके

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सत्तू बेहद सावधानी से अपनी गतिविधियां संचालित करता था। वह कभी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करता था और हमेशा साधारण कीपैड मोबाइल रखता था ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके।

वह होटलों और ढाबों पर भी केवल नकद भुगतान करता था। किसी भी प्रकार का ऑनलाइन लेनदेन करने से बचता था। अपहरण के बाद वह मुख्य सड़कों की बजाय खेतों, जंगलों और कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करता था ताकि पुलिस की निगरानी और नाकेबंदी से दूर रह सके।

किशोरी अपहरण कांड बना आखिरी अध्याय

हाल ही में तितावी क्षेत्र से एक किशोरी के अपहरण के मामले में उसका नाम सामने आया था। पुलिस के अनुसार उसने किशोरी को तीन दिन तक अपने कब्जे में रखा और बाद में यमुनानगर से बस में बैठाकर वापस भेज दिया। पीड़िता के न्यायालय में दर्ज बयान के आधार पर मुकदमे में दुष्कर्म और लूट की धाराएं भी जोड़ी गईं।

जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता की लूटी गई सोने की बाली भी बरामद कर ली है, जिसे सत्तू ने धमकाकर छीन लिया था।

परिवार भी था आतंकित, अंतिम संस्कार में बोले— अच्छा हुआ

सोमवार देर रात हुई पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद मंगलवार को अस्पताल में सत्तू की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि उसका आतंक केवल समाज तक सीमित नहीं था, बल्कि उसका अपना परिवार भी उससे भयभीत रहता था।

परिजनों के अनुसार वह कई बार घर वालों पर भी हथियार तान देता था, जिसके कारण परिवार को अपना पुश्तैनी घर छोड़कर दूसरी जगह रहना पड़ा। प्रारंभ में परिजनों ने शव लेने से भी इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मुजफ्फरनगर पहुंचे।

पत्नी, पुत्र, बहन और भांजे ने शव की पहचान कर उसे सुपुर्दगी में लिया और भोपा रोड स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। परिवार के एक सदस्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्तू एक खतरनाक अपराधी था और पुलिस की कार्रवाई से समाज को राहत मिली है।

साइको अपराधी सत्तू की मौत के साथ भले ही एक अध्याय समाप्त हो गया हो, लेकिन उसके अपराधों की भयावह कहानी लंबे समय तक लोगों के जेहन में बनी रहेगी। पुलिस अब उसके नेटवर्क, सहयोगियों और संभावित अन्य मामलों की भी गहन जांच कर रही है।

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