मुजफ्फरनगर। शहर की गांधी कॉलोनी की मेन रोड पर स्थित एक मंदिर की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। गांधी कॉलोनी निवासी रश्मि सिंह ने कुछ लोगों पर मंदिर की जमीन पर अपना अधिकार जताने और उनके परिवार को परेशान करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर बुधवार को वह जिलाधिकारी के पास पहुंचीं और अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की। महिला ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और उनके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की है।

रश्मि सिंह का दावा है कि विवादित जमीन उनकी पारिवारिक संपत्ति है और इससे संबंधित रजिस्ट्री समेत अन्य दस्तावेज उनके परिवार के पास मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस जमीन पर अपना अधिकार जताकर उनके परिवार पर दबाव बना रहे हैं। महिला के मुताबिक, जमीन को लेकर विवाद के चलते परिवार के सदस्यों में चिंता बनी हुई है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दूसरे पक्ष का बयान भी सामने नहीं आया है।

वर्ष 1971 में मंदिर निर्माण कराने का दावा
शिकायतकर्ता रश्मि सिंह के अनुसार, गांधी कॉलोनी की मेन रोड पर स्थित मंदिर का निर्माण वर्ष 1971 में उनके ससुर ने अपनी मां की याद में कराया था। उनका कहना है कि मंदिर और उससे संबंधित जमीन को लेकर उनके परिवार के पास रजिस्ट्री सहित अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वह संपत्ति पर अपने परिवार का अधिकार होने का दावा कर रही हैं।
रश्मि सिंह का कहना है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी दूर करने के लिए संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी है। इसी उद्देश्य से वह जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं और दस्तावेजों के आधार पर मामले का निस्तारण कराने की मांग की।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जमीन से संबंधित राजस्व अभिलेखों, रजिस्ट्री और अन्य उपलब्ध कागजात का परीक्षण कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है। महिला का कहना है कि निष्पक्ष जांच होने से विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
दुकान निर्माण के दौरान विवाद बढ़ने का आरोप
रश्मि सिंह ने आरोप लगाया कि जमीन पर दुकान के निर्माण के लिए पुरानी संरचना हटाने का काम शुरू किए जाने के दौरान कुछ लोगों ने उनके परिवार को परेशान किया। उनका दावा है कि कुछ लोग विवादित स्थान पर अपना अधिकार जताते हुए परिवार पर दबाव बना रहे हैं और उन्हें वहां से हटाना चाहते हैं।
महिला के मुताबिक, दो-तीन दिन पहले भी कुछ लोग गांधी कॉलोनी की मेन रोड पर स्थित उक्त स्थान पर पहुंचे थे और वहां हंगामा किया था। उन्होंने अपनी शिकायत में इस घटना का उल्लेख करते हुए प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है।
रश्मि सिंह का कहना है कि संपत्ति को लेकर विवाद होने की स्थिति में संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जानी चाहिए, न कि किसी परिवार पर दबाव बनाकर मामले को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि जमीन पर अधिकार जताने वाले लोगों के दावों और उनके दस्तावेजों की भी जांच की जाए।
हालांकि, घटना को लेकर दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में विवाद के सभी पहलुओं की पुष्टि संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
जमीन विवाद के बीच रश्मि सिंह ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि विवाद के कारण परिवार के भीतर भय का माहौल बना हुआ है और उन्हें अपने छोटे बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
महिला ने प्रशासन से मांग की कि मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी तरह की धमकी या अनुचित दबाव की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के आधार पर होना चाहिए।
रश्मि सिंह ने यह भी दावा किया कि कथित हंगामे से संबंधित एक वीडियो उनके पास सुरक्षित है। जरूरत पड़ने पर वह इसे जांच के लिए उपलब्ध करा सकती हैं। उनका कहना है कि वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच से घटना के संबंध में तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
जमीन के दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
रश्मि सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि विवादित जमीन से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच कराई जाए और दोनों पक्षों के दावों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। उन्होंने प्रशासन से मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के साथ परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दावों पर आधारित है। मंदिर की जमीन के वास्तविक स्वामित्व, कब्जे और निर्माण से संबंधित विवाद की स्थिति संबंधित अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा दोनों पक्षों के बयान की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। मामले में दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया और प्रशासन की जांच के बाद आगे की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

