मुजफ्फरनगर। कथित वोट चोरी, मतदाता सूची से नाम काटे जाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण में आ रही परेशानियों के मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने शनिवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर जिलाध्यक्ष नवीन राठी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान प्रकाश चौक पर पुलिस की घेराबंदी के बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर दिया, जिससे मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके बाद प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और धरना देकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। बाद में जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने एडीएम प्रशासन देश दीपक सिंह के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के साथ मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।

महावीर चौक स्थित कार्यालय से शुरू हुआ पैदल मार्च

शनिवार को भारतीय किसान यूनियन टिकैत के कार्यकर्ता महावीर चौक स्थित संगठन के कार्यालय पर एकत्र हुए। यहां राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित कार्यक्रम के तहत जिलाध्यक्ष नवीन राठी के नेतृत्व में पैदल मार्च निकाला गया। किसान और संगठन के पदाधिकारी केंद्र सरकार तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला मुख्यालय की ओर रवाना हुए। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, मतदाताओं के नाम काटे जाने और नए मतदाता पहचान पत्र बनवाने में आने वाली दिक्कतों को लेकर अपनी नाराजगी जताई।
पैदल मार्च के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। प्रदर्शनकारी जब प्रकाश चौक पहुंचे तो वहां पुलिस की घेराबंदी के बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर दिया। इस घटनाक्रम के दौरान मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि प्रदर्शनकारी इसके बाद आगे बढ़ते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, जहां धरना देकर उन्होंने अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा।
प्रकाश चौक पर पुतला दहन से गरमाया माहौल
प्रदर्शन के दौरान प्रकाश चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किए जाने से आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। पुलिस की मौजूदगी और घेराबंदी के बीच कार्यकर्ताओं द्वारा पुतला जलाए जाने के बाद मौके पर हलचल बढ़ गई। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना और उसे अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना जरूरी है।
भाकियू टिकैत के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम काटे जाने तथा नए मतदाताओं के पंजीकरण से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। संगठन ने इन मामलों में स्पष्टता लाने और प्रभावित मतदाताओं की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की। पुतला दहन के बाद प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और धरने के माध्यम से अपनी आवाज उठाई।
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
जिलाधिकारी कार्यालय पर धरने के दौरान भाकियू टिकैत के पदाधिकारियों ने मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा। जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने एडीएम प्रशासन देश दीपक सिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से शामिल रही।
संगठन की ओर से मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में आ रही परेशानियों पर चिंता जताई गई। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि ऐसी शिकायतों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं को अपने मताधिकार से वंचित होने की आशंका का सामना न करना पड़े।
भाकियू टिकैत ने मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों के निस्तारण, पंजीकरण प्रक्रिया को सुगम बनाने और पूरी चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना था कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इससे जुड़ी किसी भी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ज्ञापन सौंपने के साथ कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर संगठन अपनी आवाज उठाता रहेगा।
नवीन राठी ने केंद्र सरकार पर लगाए संवैधानिक अधिकार कमजोर करने के आरोप
प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने और जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और संगठनों को अपनी मांगों तथा शिकायतों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार मिलना चाहिए।
नवीन राठी ने किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान भी किसानों के आंदोलन को प्रभावित करने के लिए ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं, जिनसे अव्यवस्था का माहौल बना। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण देश में अराजकता जैसी स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने सरकार पर हिटलर की नीति अपनाने और अघोषित आपातकाल जैसी परिस्थितियां बनाने का आरोप भी लगाया।
जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि विभिन्न आंदोलनों के दौरान ट्रेन, मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने जैसी परिस्थितियां सामने आई हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार के कदमों से आम लोगों को परेशानी होती है और आंदोलनों से जुड़े लोगों की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। ये आरोप जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने प्रदर्शन के दौरान लगाए।
किसान आंदोलन का हवाला देकर संघर्ष जारी रखने का ऐलान
नवीन राठी ने मौजूदा आंदोलन को देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि किसान अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसानों ने पहले भी अपने अधिकारों और मांगों को लेकर संघर्ष किया है और जरूरत पड़ने पर आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आगामी कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी का ऐलान करते हुए कहा कि नेतृत्व की ओर से जो भी दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, उनके अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित बताते हुए इनका समाधान कराने की मांग की। उनका कहना था कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल रहना और नए मतदाताओं को पंजीकरण की सुविधा मिलना जरूरी है। मतदाता सूची में किसी प्रकार की कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर संबंधित स्तर पर उसकी जांच और उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
मतदाता सूची की कथित अनियमितताओं पर उठाए सवाल
भाकियू टिकैत के प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर रहा। संगठन ने नाम काटे जाने की शिकायतों और नए मतदाता पहचान पत्र बनवाने में आ रही परेशानियों का हवाला देते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि मतदाताओं की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए और पात्र नागरिकों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।
संगठन ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना और शिकायतों की जांच करना आवश्यक है। प्रदर्शनकारियों ने इन मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
महावीर चौक से शुरू हुआ पैदल मार्च प्रकाश चौक पर पुतला दहन और जिला मुख्यालय पर धरने के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने के साथ संपन्न हुआ। भाकियू टिकैत ने संकेत दिया कि मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर संगठन आगे भी अपने राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार कार्यक्रमों में भाग लेगा।

