मुजफ्फरनगर। नाबालिग से संबंधित अपराध के मामले में मुजफ्फरनगर की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मुकदमा थाना सिविल लाइन क्षेत्र में वर्ष 2024 में दर्ज किया गया था। पुलिस की प्रभावी पैरवी और अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चार नवंबर 2026 को अपना फैसला सुनाया।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोषी नूरदीन पुत्र घसीटा निवासी मदीना कॉलोनी, थाना सिविल लाइन, मुजफ्फरनगर के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा अपराध संख्या 259/2024 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2) और 115(2) के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 9एम/10 के तहत कार्रवाई की गई थी।

विशेष पॉक्सो अदालत में चली मामले की सुनवाई
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। इसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के सामने रखा।
लगातार सुनवाई के बाद चार नवंबर 2026 को विशेष पॉक्सो अदालत, मुजफ्फरनगर ने मामले में अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने आरोपी नूरदीन को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
एसएसपी के निर्देशन में हुई प्रभावी पैरवी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर प्रदेशभर में ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत गंभीर अपराधों में दर्ज मुकदमों की न्यायालय में प्रभावी पैरवी कराकर दोषियों को सजा दिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में एसएसपी मुजफ्फरनगर के निर्देशन में थाना सिविल लाइन पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रभावी पैरवी की। पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नूरदीन को सुनाई गई सजा को इसी अभियान के तहत पुलिस की पैरवी से जुड़ी एक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

