मुजफ्फरनगर। धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज मुकदमे में फुलत मदरसे के मौलाना हफीजुर्रहमान और उनके पुत्र जुबेर अंसारी को अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) अनुराग पंवार की अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान कर दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुकदमे की विधिक प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी और अंतिम निर्णय साक्ष्यों व सुनवाई के आधार पर ही होगा।

मौलाना हफीजुर्रहमान और उनके पुत्र जुबेर अंसारी के खिलाफ थाना रतनपुरी में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों ने संभावित गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान जमानत आवेदकों की ओर से अधिवक्ता राव मेराजुद्दीन ने अदालत में विस्तृत पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से निराधार हैं और व्यक्तिगत रंजिश के कारण मुकदमा दर्ज कराया गया है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता जिस कथित धर्म परिवर्तन की घटना का उल्लेख कर रहा है, वह लगभग आठ वर्ष पुरानी बताई गई है, जबकि उस समय उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम लागू ही नहीं था। ऐसे में बाद में लागू हुए कानून के तहत आरोप लगाए जाना प्रथम दृष्टया विधिक रूप से उचित नहीं माना जा सकता।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि अभियोजन पक्ष अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका है, जिससे कथित धर्म परिवर्तन के आरोपों की पुष्टि हो सके। अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि जिस व्यक्ति के धर्म परिवर्तन का दावा किया गया है, उसका कोई बयान न्यायालय के रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है और न ही ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है, जिससे आरोपों की पुष्टि होती हो। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर गिरफ्तारी उचित नहीं होगी।
मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद विशेष न्यायाधीश अनुराग पंवार ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया। न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए मौलाना हफीजुर्रहमान और उनके पुत्र जुबेर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत के इस आदेश के बाद दोनों को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
हालांकि न्यायालय के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि मुकदमा समाप्त हो गया है। अदालत ने केवल गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है, जबकि मामले की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। पुलिस विवेचना पूरी कर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेगी और उसके बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले पर क्षेत्र में पहले से ही चर्चाएं होती रही हैं और अदालत के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर यह प्रकरण सुर्खियों में आ गया है। अब सभी की निगाहें पुलिस विवेचना और न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी रहेंगी, जहां साक्ष्यों और कानूनी तथ्यों के आधार पर मामले का अंतिम फैसला किया जाएगा।

