मुजफ्फरनगर। जनपद में डेंगू और अज्ञात वायरल बुखार का प्रकोप लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में लोग बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों और जमीनी स्तर पर सामने आ रही मरीजों की संख्या के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के प्रतिष्ठित जैन कन्या इंटर कॉलेज, नई मंडी की प्रधानाचार्या किरन देवी भी डेंगू संक्रमण की चपेट में आ गई हैं। उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।

प्रधानाचार्या के गंभीर रूप से बीमार होने की खबर सामने आने के बाद शिक्षा जगत में चिंता का माहौल है। वहीं, लगातार बढ़ते बुखार के मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग और नगर निकायों की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

पति की फेसबुक पोस्ट से सामने आई प्रधानाचार्या की गंभीर हालत
जैन कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या किरन देवी की तबीयत बिगड़ने की जानकारी उनके पति सुदर्शन लाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट साझा कर दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी पत्नी डेंगू संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। फिलहाल बरेली के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में उनका उपचार किया जा रहा है। चिकित्सक लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
सोशल मीडिया पर यह जानकारी सामने आने के बाद शिक्षकों, शिक्षा जगत से जुड़े लोगों और परिचितों में चिंता फैल गई। बड़ी संख्या में लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। वहीं, इस घटना ने जिले में डेंगू संक्रमण की गंभीरता और उससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर भी बहस छेड़ दी है।
सरकारी आंकड़ों में 39 डेंगू मरीज, निजी अस्पतालों में अधिक मरीज पहुंचने का दावा
जनपद में डेंगू के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों और निजी अस्पतालों में सामने आ रही स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार तेवतिया के अनुसार, जिले में अब तक डेंगू के 39 मरीजों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। विभाग की ओर से जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के उपचार के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है।
दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों और निजी चिकित्सा संस्थानों से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी लैब में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बुखार से पीड़ित मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ स्थानीय दावों में रोजाना 50 से अधिक डेंगू के नए मरीज आने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए निजी अस्पतालों से प्राप्त सूचनाओं, जांच रिपोर्टों और आधिकारिक रूप से पुष्ट मामलों के बीच अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है। निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले प्रत्येक बुखार के मरीज को डेंगू का मरीज नहीं माना जा सकता, लेकिन संदिग्ध मामलों की समय पर जांच और रिपोर्टिंग संक्रमण की वास्तविक स्थिति समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
निजी अस्पतालों से आंकड़े जुटाने की व्यवस्था पर उठे सवाल
डेंगू और वायरल बुखार के बढ़ते मामलों के बीच निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब से मरीजों की नियमित जानकारी जुटाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निजी चिकित्सा संस्थानों में बड़ी संख्या में मरीज उपचार करा रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग को उनकी जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी जानकारी का व्यवस्थित संकलन करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण के लिए समय पर जांच, मरीजों की निगरानी, संदिग्ध मामलों की पहचान और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना आवश्यक है। ऐसे में सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के बिना संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो सकता है।
नालियों में जलभराव और गंदगी से मच्छरों के पनपने का खतरा
डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच नगर पालिका और नगर पंचायतों की सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शहर की कई कॉलोनियों और मोहल्लों में नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालियों में गंदगी जमा होने और खाली प्लॉटों में पानी इकट्ठा होने के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ रही है।
लोगों का कहना है कि कई इलाकों में मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, लेकिन नियमित फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में जमा छोटे-छोटे स्थानों पर भी पनप सकता है। घरों के आसपास रखे कूलर, गमले, पुराने टायर, पानी की टंकियां और अन्य पात्र इसके प्रजनन स्थल बन सकते हैं।
ऐसे में केवल मुख्य सड़कों पर फॉगिंग कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए घरों और आसपास जमा पानी की नियमित जांच, लार्वा नष्ट करने तथा व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निकायों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत
जनपद में बुखार और डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर पालिका, नगर पंचायतों और ग्रामीण निकायों को भी संयुक्त रूप से अभियान चलाने की जरूरत है। प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने, बुखार के मरीजों की जांच कराने, निजी अस्पतालों से नियमित रिपोर्ट प्राप्त करने और संवेदनशील इलाकों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने जैसे कदम महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा लोगों को भी अपने घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने के प्रति जागरूक करना होगा। बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक जांच कराना जरूरी है।
प्रधानाचार्या के स्वास्थ्य को लेकर शिक्षा जगत चिंतित
जैन कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या किरन देवी के गंभीर रूप से बीमार होने की घटना ने जिले में डेंगू के खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। शिक्षा जगत से जुड़े लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। वहीं, आम नागरिकों का कहना है कि डेंगू और वायरल बुखार के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन को केवल आंकड़े जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में धरातल पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
फिलहाल प्रधानाचार्या किरन देवी का बरेली के निजी अस्पताल में उपचार जारी है। दूसरी ओर, जिले में डेंगू और वायरल बुखार की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी तथा सफाई और मच्छररोधी अभियान की प्रभावशीलता आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

