मुजफ्फरनगर। जनपद में अपराध और संगठित आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई के बीच विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त एक शातिर अपराधी को दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आर्थिक दंड भी लगाया और फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार भेजने के आदेश जारी कर दिए।

यह फैसला विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-पांच श्रीमती रेखा सिंह की अदालत द्वारा सुनाया गया। विशेष वाद संख्या 2009/2025 में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। सभी तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने अभियुक्त महताब पुत्र फजला निवासी खालापार, थाना कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(1) के तहत दोषी ठहराया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त के विरुद्ध प्रस्तुत साक्ष्य उसे दोषमुक्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने महताब को दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी निर्धारित अवधि में अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसे सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही अदालत ने कानून के प्रावधानों के अनुरूप यह आदेश भी दिया कि मुकदमे के विचारण के दौरान अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को उसकी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।
सोमवार को खुले न्यायालय में जैसे ही सजा का ऐलान हुआ, अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के बीच हलचल बढ़ गई। फैसले के बाद न्यायालय ने दोषी को निर्णय की प्रमाणित प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इसके साथ ही आवश्यक न्यायिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए सजायाफ्ता वारंट जारी किया गया और अभियुक्त को तत्काल हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया।
जनपद में गैंगस्टर एक्ट के मामलों में प्रभावी पैरवी और लगातार हो रही सजाओं को कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायिक सूत्रों का कहना है कि ऐसे फैसले संगठित अपराध में लिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश हैं कि कानून के शिकंजे से बच पाना आसान नहीं है। वहीं पुलिस और अभियोजन विभाग ने भी इस निर्णय को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर में गैंगस्टर एक्ट के मामलों में लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है और अपराधियों के विरुद्ध मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालतों में पैरवी की जा रही है। ताजा फैसले को भी उसी कड़ी का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है, जिससे आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के बीच कानून का भय और अधिक बढ़ेगा।

