मुजफ्फरनगर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल! जांच में 141 में से 85 नमूने फेल, 36 असुरक्षित; दूध के 14 सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे

मुजफ्फरनगर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल! जांच में 141 में से 85 नमूने फेल, 36 असुरक्षित; दूध के 14 सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे

मुजफ्फरनगर। जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों में से प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर आधे से अधिक नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। छह महीने के दौरान विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 229 नमूने एकत्र किए गए थे, जिनमें से 141 की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इनमें 85 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस तरह रिपोर्ट प्राप्त नमूनों में करीब 60.3 प्रतिशत नमूने फेल पाए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की सहायक आयुक्त अर्चना धीरान की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, फेल नमूनों में 44 अधोमानक, 36 असुरक्षित और पांच मिथ्याछाप श्रेणी के हैं। इन आंकड़ों के बीच दूध के नमूनों की जांच भी चिंता का विषय बनकर सामने आई है। दूसरी ओर, खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में एडीएम न्यायालय में 108 वादों में कुल 29 लाख 90 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

85 नमूनों में मिलीं अलग-अलग तरह की खामियां

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अप्रैल से सितंबर 2026 तक एकत्र किए गए कुल 229 नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। इनमें से अब तक 141 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 85 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले, जबकि शेष 56 नमूने मानकों पर खरे पाए गए।

फेल नमूनों में 44 अधोमानक श्रेणी के हैं। इस श्रेणी में वे खाद्य पदार्थ आते हैं, जो निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते। इनमें खाद्य पदार्थों की संरचना, निर्धारित घटकों की मात्रा या गुणवत्ता से संबंधित कमियां हो सकती हैं।

इसके अलावा, 36 नमूने असुरक्षित श्रेणी में पाए गए हैं। ऐसे मामलों में खाद्य पदार्थ के सेवन से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने की आशंका से जुड़े पहलू सामने आ सकते हैं। इन मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।

वहीं, पांच नमूने मिथ्याछाप श्रेणी में पाए गए हैं। इस श्रेणी में लेबल, उत्पाद संबंधी जानकारी, प्रस्तुतीकरण या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं। नमूनों में मिली खामियों की प्रकृति के आधार पर संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

दूध के 23 नमूनों की रिपोर्ट आई, 14 फेल

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के दौरान दूध के नमूनों में भी खामियां सामने आई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच जिले में दूध के कुल 30 नमूने लिए गए थे। इनमें से 23 की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है।

प्राप्त रिपोर्टों में दूध के 14 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें 13 नमूने अधोमानक और एक नमूना असुरक्षित श्रेणी का है। इस प्रकार जांच रिपोर्ट प्राप्त दूध के नमूनों में करीब 60.9 प्रतिशत नमूने फेल रहे।

दूध के नमूनों में अधोमानक पाए जाने का संबंध निर्धारित गुणवत्ता मानकों या उसकी संरचना में कमी से हो सकता है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में प्रत्येक नमूने में पाई गई विशिष्ट कमी का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसी तरह, असुरक्षित श्रेणी में मिले नमूने के संबंध में भी अलग से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

दूध दैनिक उपभोग की प्रमुख खाद्य वस्तुओं में शामिल है। ऐसे में इसके नमूनों की नियमित जांच और मानकों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। विभागीय जांच में सामने आए आंकड़े दूध समेत अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

88 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार

कुल 229 नमूनों में से अभी 141 की रिपोर्ट ही प्राप्त हुई है। इस लिहाज से 88 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी है। ऐसे में फिलहाल सभी नमूनों की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

प्राप्त रिपोर्टों में 85 नमूने फेल पाए गए हैं, जबकि 56 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप मिले हैं। शेष नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान लिए गए सभी नमूनों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

एडीएम न्यायालय में 108 वादों में 29.90 लाख का अर्थदंड

खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में विभागीय जांच के साथ विधिक कार्रवाई के आंकड़े भी सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच एडीएम न्यायालय में कुल 108 वाद दर्ज अथवा निर्णीत किए गए और इन मामलों में कुल 29 लाख 90 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मामलों की प्रकृति और संबंधित प्रावधानों के अनुसार जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 108 वादों में से कितने नए दर्ज हुए और कितने का निस्तारण किया गया। अलग-अलग मामलों में लगाए गए जुर्माने का विवरण भी उपलब्ध नहीं है।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जांच जरूरी

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से लिए गए नमूनों की जांच का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखना और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। जांच में अधोमानक, असुरक्षित और मिथ्याछाप नमूने मिलने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मुजफ्फरनगर में छह महीने के दौरान प्राप्त रिपोर्टों में 85 नमूनों का फेल होना और दूध के 14 नमूनों में खामियां मिलना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की अहमियत को सामने लाता है। हालांकि, सभी नमूनों की रिपोर्ट आने और अलग-अलग मामलों में की गई कार्रवाई का पूरा विवरण उपलब्ध होने के बाद ही विभागीय कार्रवाई की समग्र स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।

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