मुजफ्फरनगर। भोपा थाना पुलिस ने एटीएम मशीनों के जरिए बैंक और खाताधारकों को चूना लगाने वाले एक अंतरराज्यीय शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह एटीएम मशीन में तकनीकी अवरोध पैदा कर एक ही ट्रांजेक्शन में दोहरा फायदा उठाता था और बैंकों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 40 हजार रुपये नकद, विभिन्न बैंकों के 30 एटीएम कार्ड तथा वारदात में प्रयुक्त एक हुंडई वेन्यू कार बरामद की है।

यह कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक, क्षेत्राधिकारी भोपा लक्ष्मण वर्मा तथा थाना प्रभारी निरीक्षक आशुतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एटीएम मशीनों में तकनीकी अवरोध उत्पन्न कर धोखाधड़ी करने वाला एक संगठित गिरोह भोपा क्षेत्र में सक्रिय है और किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। सूचना के आधार पर थाना भोपा पुलिस ने कस्बा भोपा में सघन वाहन चेकिंग अभियान शुरू किया।
चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध हुंडई वेन्यू कार को रोककर उसकी तलाशी ली। तलाशी में कार सवार चार लोगों के पास से 40 हजार रुपये नकद और विभिन्न बैंकों के 30 एटीएम कार्ड बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने सुनील पुत्र गोवर्धन सिंह निवासी गिरधरपुर मोहनीपुर, जनपद कानपुर देहात, रविंद्र पुत्र बाबूलाल निवासी गोविंद बस्ती, झुंझुनू (राजस्थान), देवेंद्र पुत्र महेंद्र निवासी झुंझुनू (राजस्थान) तथा सूरज पुत्र स्वर्गीय महेशचंद्र कुशवाह निवासी नया पटेल नगर, उरई (जनपद जालौन) को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने ठगी का ऐसा तरीका बताया जिसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया। आरोपियों ने बताया कि वे पहले भोले-भाले लोगों और अपने परिचितों का विश्वास जीतकर उनके एटीएम कार्ड और पिन हासिल कर लेते थे। इसके बाद उन्हीं कार्डों से एटीएम मशीन से नकदी निकालने का प्रयास करते थे। जैसे ही मशीन से रुपये बाहर आने लगते थे, वे कैश डिस्पेंसर स्लॉट को लोहे की कील या किसी कठोर वस्तु से जाम कर देते थे। इससे कुछ नकदी उनके हाथ लग जाती थी, जबकि शेष रकम मशीन के भीतर फंस जाती थी या वापस चली जाती थी।
इसके बाद आरोपी संबंधित बैंक के टोल-फ्री नंबर पर फोन कर झूठी शिकायत दर्ज कराते थे कि एटीएम से पैसा नहीं निकला। बैंक की प्रक्रिया के तहत पूरी राशि दोबारा खाते में वापस कर दी जाती थी। बाद में आरोपी मशीन में फंसी हुई नकदी भी निकाल लेते थे। इस तरह एक ही ट्रांजेक्शन में उन्हें दोहरा आर्थिक लाभ मिलता था और बैंक को नुकसान उठाना पड़ता था।
पुलिस ने इस मामले में थाना भोपा पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(5), 318(4), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उनके नेटवर्क और अन्य वारदातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार गिरोह के मुख्य आरोपी सुनील के खिलाफ इससे पहले भी कानपुर नगर के नौबस्ता दक्षिणी थाने में धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। अन्य आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन कराया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किन-किन राज्यों में इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक सत्यप्रकाश यादव, हेड कांस्टेबल आदित्य चौधरी, हेड कांस्टेबल विनय कुमार, हेड कांस्टेबल सुशील कुमार, कांस्टेबल प्रवीण कुमार, कांस्टेबल रितिक कुमार तथा कांस्टेबल प्रमोद कुमार की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस खुलासे के बाद एक बार फिर एटीएम सुरक्षा व्यवस्था और साइबर ठगी के बदलते तौर-तरीकों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपना एटीएम कार्ड और पिन किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि एटीएम से लेनदेन के दौरान कोई तकनीकी समस्या या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल संबंधित बैंक और पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके।

