मुजफ्फरनगर। खतौली क्षेत्र के गांव जसौला में करीब पौने तीन साल पहले हुए 21 वर्षीय अंकित हत्याकांड में अदालत ने पति-पत्नी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने मीनाक्षी और उसके पति सोनू को उम्रकैद के साथ 50-50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। दोनों पर कुल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अभियोजन के अनुसार अंकित और गांव की रहने वाली मीनाक्षी के बीच प्रेम संबंध थे। आरोप था कि मीनाक्षी अपने पति सोनू के साथ रहना चाहती थी। इसी वजह से अंकित को उसके घर बुलाकर बंधक बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। गंभीर चोटों के चलते अंकित की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सात गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किए।

सात जनवरी 2024 की शाम घर से निकला था अंकित
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार त्यागी के अनुसार खतौली थाना क्षेत्र के गांव जसौला निवासी रणवीर सिंह का 21 वर्षीय पुत्र अंकित सात जनवरी 2024 की शाम गांव के ही करणपाल के बेटे के साथ घर से निकला था। बाद में अंकित मीनाक्षी के घर पहुंचा।
अंकित के मीनाक्षी के घर जाने की जानकारी मिलने पर उसके पिता रणवीर सिंह और बड़ा भाई लवकुश उसकी तलाश करते हुए वहां पहुंच गए। परिजनों ने घर का दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन काफी देर तक अंदर से दरवाजा नहीं खोला गया।
दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस को दी सूचना
काफी प्रयास के बाद भी दरवाजा नहीं खुलने पर अंकित के परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद घर का दरवाजा खुलवाया गया। अंदर अंकित बेसुध हालत में पड़ा मिला।
अभियोजन के अनुसार अंकित के गले में मफलर बंधा हुआ था और उसके शरीर पर चोट के निशान थे। माथे तथा हाथ-पैर से खून निकल रहा था। पुलिस ने उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलाने की कार्रवाई की, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी।
जांच में सामने आया प्रेम संबंध का मामला
पुलिस की विवेचना के दौरान अंकित और मीनाक्षी के बीच प्रेम संबंध होने की बात सामने आई। अभियोजन का आरोप था कि मीनाक्षी अपने पति सोनू को छोड़ना नहीं चाहती थी और इसी कारण अंकित को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।
अभियोजन के अनुसार अंकित को मीनाक्षी के घर बुलाने के बाद उसे बंधक बनाया गया। इसके बाद मीनाक्षी और उसके पति सोनू ने उसके साथ डंडों से मारपीट की। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय मीनाक्षी मौके पर मौजूद थी।
तीन दिन बाद गिरफ्तार हुआ था दंपती
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। विवेचना और पूछताछ के आधार पर मीनाक्षी और उसके पति सोनू को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने दोनों को 10 जनवरी 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में शुरू हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं।
अभियोजन ने पेश किए सात गवाह
मुकदमे में अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार त्यागी ने पैरवी की। अभियोजन ने अपने पक्ष को साबित करने के लिए कुल सात गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किए। इनमें मृतक अंकित के पिता रणवीर सिंह और बड़ा भाई लवकुश भी शामिल रहे।
अभियोजन की ओर से गवाहों के बयानों के अलावा मामले से संबंधित अन्य साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने मीनाक्षी और सोनू को दोषी ठहराया।
पिता और भाई की सूचना पर खुला था मामला
अंकित की मौत का मामला उस समय सामने आया, जब उसके पिता रणवीर सिंह और भाई लवकुश उसे तलाशते हुए मीनाक्षी के घर पहुंचे थे। दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा खुलने के बाद अंकित अंदर बेसुध हालत में मिला था।
अभियोजन ने इस पूरे घटनाक्रम को न्यायालय के समक्ष रखा। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी माना।
दंपती को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माना
विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने मीनाक्षी और उसके पति सोनू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस तरह दोनों पर कुल एक लाख रुपये का जुर्माना हुआ।
अदालत के फैसले के साथ ही सात जनवरी 2024 को सामने आए अंकित हत्याकांड में चली न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण का समापन हुआ। अभियोजन के अनुसार प्रेम संबंध से जुड़े विवाद के बाद हुई इस हत्या के मामले में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पति-पत्नी को दोषी ठहराया।

