मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में भड़के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक और पुराने मुकदमे में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मुंडभर में मकान और मस्जिद में आगजनी, तोड़फोड़ तथा लूटपाट के करीब 13 साल पुराने मामले में पांच आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए तीनों मुख्य गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और उन्होंने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के कारण न्यायालय ने पांचों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही वर्ष 2013 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा एक और पुराना मुकदमा निस्तारित हो गया।

घर में घुसकर मारपीट, लूटपाट और आगजनी का था आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मुंडभर निवासी शाहबुद्दीन ने 18 सितंबर 2013 को मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आठ सितंबर 2013 की शाम करीब छह बजे लगभग 50 लोग उसके घर में घुस आए थे। हमलावरों ने परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की और घर में रखे सोने-चांदी के जेवरात तथा नकदी लूट ली। इसके बाद आरोपियों ने मकान में आग लगा दी थी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि हमलावरों ने घर के पास स्थित मस्जिद को भी निशाना बनाया था। वहां तोड़फोड़ और आगजनी करने के साथ ही मस्जिद में चंदे के रूप में एकत्र करीब एक लाख रुपये की धनराशि लूट ली गई थी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की थी।
पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया था आरोप-पत्र
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद अनुज, विक्कू उर्फ अरविंद, नीटू, अंकित और रामकुमार के खिलाफ बलवा, लूटपाट, आगजनी, तोड़फोड़ और धार्मिक भावनाओं को आहत करने सहित विभिन्न धाराओं में आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। इसके बाद मामले की न्यायिक सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए वादी शाहबुद्दीन के अलावा साजिद अली और आबिद अली को गवाह के रूप में पेश किया। हालांकि, अदालत में तीनों गवाह अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं कर सके और अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। मुख्य गवाहों के समर्थन नहीं करने से अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर पाया।
साक्ष्यों के अभाव में पांचों आरोपियों को मिला संदेह का लाभ
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। तीनों मुख्य गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के बाद अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ गई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित नहीं होने पर न्यायालय ने पांचों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। करीब 13 साल पुरानी इस कानूनी लड़ाई के बाद मामले का निस्तारण हो गया।
कवाल की घटना के बाद भड़की थी सांप्रदायिक हिंसा
मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 में हुई सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत 27 अगस्त को जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल में शाहनवाज की हत्या के बाद हुई थी। इसके बाद मलिकपुरा निवासी ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या से हालात और तनावपूर्ण हो गए थे। सात सितंबर को महापंचायत से लौट रहे लोगों पर हमले की घटनाओं के बाद जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी।
दंगों के दौरान 65 लोगों की जान गई थी, जबकि 50 हजार से अधिक लोगों को अपने गांव और बस्तियां छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी। हिंसा के बाद जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 510 मुकदमे दर्ज किए गए थे।
510 मुकदमों में दर्ज हुए थे मामले, 120 से अधिक में आ चुके हैं फैसले
दंगों के बाद दर्ज 510 मुकदमों में से 175 मामलों में एसआईटी ने विवेचना पूरी कर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किए थे। वहीं, 165 मामलों में साक्ष्यों के अभाव में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई थी, जबकि 170 मुकदमों को झूठा पाए जाने पर निरस्त किया गया था।
करीब 13 वर्षों के दौरान 120 से अधिक मुकदमों में फैसले आ चुके हैं। इन मामलों में 1500 से अधिक दंगा आरोपियों के बरी होने की जानकारी दी गई है। वर्तमान में 170 से अधिक मुकदमों की सुनवाई विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है।
सचिन-गौरव हत्याकांड में सात दोषियों को हुई थी उम्रकैद
वर्ष 2013 के दंगों से जुड़े चर्चित मुकदमों में मलिकपुरा निवासी ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या का मामला भी शामिल है। इस मामले में गांव कवाल निवासी मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, नदीम, जहांगीर और इकबाल सहित सात दोषियों को आठ फरवरी 2019 को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
वहीं, सामूहिक दुष्कर्म के एक अन्य मामले में आठ मई 2023 को महेशवीर और सिकंदर को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। दंगों से जुड़े पुराने मुकदमों में लगातार आ रहे फैसलों के बीच मुंडभर गांव के मकान और मस्जिद में आगजनी तथा लूटपाट के मामले में पांच आरोपियों की दोषमुक्ति भी न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम घटनाक्रम है।

