मुजफ्फरनगर। जिला सहकारी बैंक के संचालन मंडल की वैधानिक स्थिति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले के बाद बैंक के बोर्ड में बड़ा बदलाव हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह समेत तीन संचालकों का पद समाप्त हो गया है। उनके साथ संचालक पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक एडवोकेट भी अब बैंक के संचालन मंडल का हिस्सा नहीं रहेंगे। अदालत के इस फैसले का सीधा असर बैंक के मौजूदा बोर्ड की संरचना पर पड़ा है और अब संचालन मंडल में दस सदस्य रह गए हैं।

मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की सीनियर बेंच में न्यायमूर्ति जे जे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्राथमिक सहकारी समितियों के पुनर्गठन और उनके विभाजन के बाद जिला सहकारी बैंक के संचालन मंडल में प्रतिनिधियों की सदस्यता को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया।

दरअसल पूरा विवाद प्राथमिक सहकारी समितियों के पुनर्गठन और उनके विभाजन के बाद उन समितियों से जुड़े प्रतिनिधियों की वैधानिक स्थिति को लेकर खड़ा हुआ था। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि यदि किसी प्राथमिक सहकारी समिति का पुनर्गठन या विभाजन हो चुका है और संबंधित प्रतिनिधि अपनी मूल समिति के बोर्ड का हिस्सा नहीं रह गए हैं, तो क्या वह जिला सहकारी बैंक के संचालक या सभापति के पद पर बने रह सकते हैं।
करीब छह महीने पहले संजय जैन बनाम सरकार मामले में याचिकाकर्ता सचिन जैन की ओर से हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में प्राथमिक सहकारी समितियों के विभाजन और पुनर्गठन को आधार बनाते हुए संबंधित संचालकों की सदस्यता पर सवाल उठाया गया था।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दलील दी गई कि जिन प्राथमिक समितियों के प्रतिनिधित्व के आधार पर संबंधित लोग जिला सहकारी बैंक के संचालन मंडल में पहुंचे थे, पुनर्गठन और विभाजन के बाद उनकी मूल समितियों में पूर्व की स्थिति समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में जब प्राथमिक समिति के बोर्ड में उनका प्रतिनिधित्व ही नहीं रहा, तो उसके आधार पर जिला सहकारी बैंक के संचालक और सभापति पद पर बने रहना भी वैधानिक रूप से उचित नहीं था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस दलील का सीधा असर बैंक के मौजूदा संचालन मंडल पर पड़ा है। सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह के साथ पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक एडवोकेट का पद भी समाप्त हो गया है। इसके चलते बैंक के बोर्ड में अब पहले की तुलना में तीन सदस्य कम रह गए हैं।
पहले जिला सहकारी बैंक के संचालन मंडल में सभापति समेत कुल चौदह सदस्य थे। तीन पद समाप्त होने के बाद अब दस सदस्यीय बोर्ड रह गया है। मौजूदा बोर्ड में किसान नेता राजू अहलावत, पूर्व प्रमुख अमित चौधरी बढेडी, पूर्व प्रमुख अनार सिंह रवि, पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरेन्द्र शर्मा, दो महिला संचालक और उपसभापति मुकेश कुमार जैन समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।
इस फैसले को सहकारी क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर केवल तीन पदों के समाप्त होने तक सीमित नहीं है। प्राथमिक सहकारी समितियों के पुनर्गठन और उनके प्रतिनिधियों की वैधानिक स्थिति को लेकर अदालत की ओर से दिए गए निर्णय का प्रभाव आगे की सहकारी प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
ठाकुर रामनाथ सिंह को जून 2023 में मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक का सभापति चुना गया था। उन्हें पूर्व भाजपा विधायक उमेश मलिक का करीबी माना जाता है। सभापति समेत तीन संचालकों के पद समाप्त होने के बाद बैंक की राजनीति और सहकारी क्षेत्र में भी नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल खाली हुए पदों को लेकर है। इन पदों को किस प्रक्रिया के तहत भरा जाएगा और संचालन मंडल की आगे की संरचना क्या होगी, इसका निर्णय संबंधित सहकारी कानूनों, नियमों और शासन के निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक के संचालन मंडल में बड़ा बदलाव कर दिया है। सभापति समेत तीन संचालकों के पद समाप्त होने से बैंक की मौजूदा व्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। अब सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजरें आगे होने वाली प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया पर टिकी हैं।

