मुजफ्फरनगर: गांव-गांव में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए ग्राम समितियों का गठन, बच्चों ने ली बाल विवाह नहीं करने की शपथ

मुजफ्फरनगर: गांव-गांव में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए ग्राम समितियों का गठन, बच्चों ने ली बाल विवाह नहीं करने की शपथ

मुजफ्फरनगर। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रामीण समाज विकास केंद्र जीएसवीके और जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था की ओर से गांव-गांव अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 22 सितंबर 2026 को सदर ब्लॉक क्षेत्र के सिसौना, रामपुर और किला मोहल्ला गांव में बच्चों के अधिकारों एवं उनकी सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के पदाधिकारियों ने ग्रामीणों और बच्चों को बाल अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों को शिक्षा के अधिकार, स्वतंत्रता के अधिकार तथा सुरक्षित वातावरण में सम्मानपूर्वक विकास के अधिकार के बारे में बताया गया। इस दौरान बच्चों को बाल विवाह नहीं करने की शपथ भी दिलाई गई।

संस्था की ओर से ग्रामीणों से अपील की गई कि प्रत्येक बच्चे को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़ा जाए और बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम अथवा अन्य बाल अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दी जाए।

गांव स्तर पर गठित की गई बाल संरक्षण समिति

बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं की पहचान करने के उद्देश्य से गांव में ग्राम बाल कल्याण संरक्षण समिति का गठन किया गया। समिति के माध्यम से गांव में बच्चों से जुड़े मामलों पर नजर रखने, जरूरतमंद बच्चों तक सहायता पहुंचाने और ग्रामीणों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

संस्था के अनुसार ग्राम स्तर पर समितियां सक्रिय होने से बच्चों से संबंधित समस्याओं की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकेगी। इसके साथ ही किसी गंभीर मामले की सूचना समय रहते संबंधित विभाग और प्रशासन तक पहुंचाई जा सकेगी, जिससे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

1098 और 112 की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा आपातकालीन पुलिस सहायता नंबर 112 के बारे में भी जानकारी दी गई। संस्था की ओर से इन हेल्पलाइन नंबरों का गांव-गांव में प्रचार प्रसार किया जा रहा है।

ग्रामीणों को बताया गया कि यदि किसी बच्चे के सामने संकट की स्थिति उत्पन्न होती है या उसके साथ बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा अथवा शोषण जैसी घटना की जानकारी मिलती है तो तत्काल संबंधित हेल्पलाइन पर सूचना देकर सहायता प्राप्त की जा सकती है।

बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम में बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में भी बच्चों और ग्रामीणों को जानकारी दी गई। संस्था की ओर से लोगों से अपील की गई कि बच्चों की कम उम्र में शादी करने के बजाय उन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपने भविष्य का निर्माण कर सकें।

संस्था सचिव मेहरचंद ने कहा कि भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत संस्था शासन, प्रशासन और न्याय विभाग के साथ मिलकर लगातार गांव-गांव में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि कहीं भी बाल विवाह या बाल श्रम की जानकारी मिलने पर मामले को नजरअंदाज न करें और तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना दें।

संस्था की ओर से आयोजित अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ उनके अधिकारों और सुरक्षा को लेकर सामुदायिक भागीदारी मजबूत करना है। संस्था का कहना है कि गांव स्तर पर जागरूकता और सामुदायिक निगरानी के माध्यम से बच्चों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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