मुजफ्फरनगर। पशुओं में बांझपन, प्रजनन संबंधी समस्याओं और दुग्ध उत्पादन में आ रही परेशानियों के समाधान के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ की पशु चिकित्सा विशेषज्ञ टीम ने खतौली क्षेत्र के ग्राम सोमाली में निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किया। पशुपालन विभाग के सहयोग और इफको के वित्तीय सहयोग से आयोजित इस शिविर में 150 से अधिक पशुओं की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता में सुधार, संतुलित पोषण और संक्रामक रोगों से बचाव के संबंध में भी जागरूक किया।

यह शिविर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को उनके गांव में ही विशेषज्ञ पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना और पशुओं में बांझपन सहित प्रजनन संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान कर उनके समाधान के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

बांझपन और प्रजनन संबंधी समस्याओं के बताए कारण
शिविर के परियोजना प्रभारी प्रो. अमित कुमार वर्मा ने पशुओं में बांझपन और प्रजनन संबंधी समस्याओं के विभिन्न कारणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुओं में कभी-कभी मद चक्र अनियमित हो सकता है। कुछ पशु आठ से दस दिनों के अंतराल पर बार-बार गर्मी में आने लगते हैं। ऐसी स्थिति का एक संभावित कारण अंडाशय में सिस्ट यानी गांठ जैसी संरचना का बनना भी हो सकता है, जिसे ओवेरियन सिस्ट कहा जाता है।
उन्होंने पशुपालकों को समझाया कि पशुओं में बार-बार गर्मी के लक्षण दिखाई देना, समय पर गर्भधारण नहीं होना और प्रजनन चक्र में अनियमितता जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में पशु चिकित्सक से जांच कराकर वास्तविक कारण का पता लगाना जरूरी है। समय पर पहचान और उचित उपचार से पशुओं की प्रजनन क्षमता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
प्रो. वर्मा ने पशुपालकों को पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार की व्यवस्था करने और नियमित रूप से गुणवत्तायुक्त खनिज मिश्रण देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आहार में आवश्यक पोषक तत्वों की उचित मात्रा पशुओं के समग्र स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और दुग्ध उत्पादन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पशुपालकों को पशुओं की शारीरिक स्थिति और प्रजनन संबंधी व्यवहार पर भी नियमित निगरानी रखने की सलाह दी गई।
खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेन्द्र गुप्ता ने पशुपालकों को खुरपका-मुंहपका रोग के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि यह पशुओं में फैलने वाला अत्यंत संक्रामक रोग है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए पशुओं का समय पर टीकाकरण कराना, उनके रहने के स्थान पर साफ-सफाई बनाए रखना और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय रहते रोग की पहचान और उचित चिकित्सकीय देखभाल से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी लाभकारी पशुपालन के लिए जरूरी है।
ग्रामीण पशुपालकों को गांव में ही मिल रहीं विशेषज्ञ सेवाएं
पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की पशु चिकित्सा विशेषज्ञ टीम ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर पशुपालकों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशुओं का स्वस्थ रहना, उन्हें समय पर उपचार मिलना और प्रजनन संबंधी समस्याओं का समाधान होना पशुपालकों के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार से पशुओं में होने वाली कई समस्याओं की पहचान कर उनका उचित समाधान किया जा सकता है। इस तरह के शिविर पशुपालकों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और अपने पशुओं की समस्याओं के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने का अवसर देते हैं।
विशेषज्ञों की टीम ने दी सेवाएं
ग्राम सोमाली में आयोजित शिविर में डॉ. अफरोज, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुभमदीप, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. स्नेहा गुप्ता, डॉ. इशिता नौटियाल और डॉ. ईशान सहित पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने सेवाएं प्रदान कीं। शिविर का आयोजन उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव चौधरी तथा डॉ. नागेन्द्र सिन्धु के नेतृत्व में किया गया।
शिविर के माध्यम से पशुओं की स्वास्थ्य जांच और उपचार के साथ पशुपालकों को पोषण, प्रजनन प्रबंधन तथा संक्रामक रोगों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय की इस पहल से ग्रामीण पशुपालकों को अपने पशुओं की समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

