मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि लहसुन की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिले। मुख्यमंत्री किसानों को उनके उत्पाद का पर्याप्त मूल्य नहीं मिलने और फसलों को नदियों और बाजारों में फेंकने के लिए मजबूर होने की खबरों के मद्देनजर अपने आवास पर राज्य में लहसुन किसानों की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। चौहान ने अधिकारियों से कहा कि लहसुन किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए बाजार स्तर पर ग्रेडिंग सिस्टम स्थापित करें।

उन्होंने अधिकारियों को पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और अन्य राज्यों में प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया जहां लहसुन की मांग अधिक है। बैठक में यह भी बताया गया कि देवास, धार, मंदसौर, नीमच, रतलाम और उज्जैन के बाजारों में ग्रेडिंग मशीनें लगाई जाएंगी। पिछले वर्षों की तुलना में अप्रैल से सितंबर तक लहसुन का उत्पादन अधिक रहा है, जिससे संकट खड़ा हो गया है।

इस बीच ‘पीटीआई/भाषा’ से बातचीत में लहसुन की खेती करने वाले किसान विकास सिसोदिया ने कहा, ‘‘मुझे इंदौर की मंडी में लहसुन का एक रुपये प्रति किलोग्राम का दाम मिल रहा था। इससे लहसुन की उत्पादन लागत, फसल तुड़वाने, इसे भंडारित करने और मंडी तक पहुंचाने का खर्च नहीं निकलता। इसलिए मैंने लहसुन की अपनी फसल को गांव के नाले में फेंकना उचित समझा। उन्होंने दावा किया कि चार बीघा में लहसुन की खेती से उन्हें कुल मिलाकर तीन लाख रुपये का घाटा झेलना पड़ा है।
