मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन राजनीति में संगठनात्मक एकजुटता की कोशिशें तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में नेशनल भीम आर्मी (बहुजन एकता मिशन) के चीफ लोकेश कटारिया ने आजाद समाज पार्टी और एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद को मजबूत करने का ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 26 नवंबर को लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर पार्क में विशाल संकल्प महारैली आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर नेशनल भीम आर्मी के भीम आर्मी भारत एकता मिशन में विलय की दिशा में ठोस कदम उठाने की बात भी कही गई।

सोमवार को मुजफ्फरनगर के मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान लोकेश कटारिया ने संगठन की आगामी रणनीति, बहुजन समाज की एकता और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

26 नवंबर को लखनऊ में होगी संकल्प महारैली
लोकेश कटारिया ने बताया कि 26 नवंबर को लखनऊ स्थित रमाबाई आंबेडकर पार्क में प्रस्तावित संकल्प महारैली का उद्देश्य बहुजन समाज की एकजुटता का संदेश देना और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक संख्या में रैली में पहुंचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज की राजनीतिक और सामाजिक ताकत बढ़ाने के लिए विभिन्न संगठनों को आपसी मतभेद भुलाकर साझा उद्देश्यों के लिए काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, नेशनल भीम आर्मी की टीम आने वाले समय में आजाद समाज पार्टी को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगी।
कटारिया ने संगठन के विलय की दिशा में प्रस्तावित कदम को भी इसी प्रयास का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि एकजुट होकर काम करने से बहुजन समाज की आवाज को अधिक प्रभावी तरीके से उठाया जा सकता है।
2027 के चुनाव में आजाद समाज पार्टी को मजबूत करने का लक्ष्य
प्रेस वार्ता में लोकेश कटारिया ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने आजाद समाज पार्टी को आगामी चुनाव में मजबूत स्थिति में लाने और पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने के लक्ष्य की बात कही।
कटारिया ने कहा कि जनता ऐसी राजनीति की अपेक्षा करती है जो आम लोगों की समस्याओं को समझे और उनके मुद्दों को मजबूती से उठाए। उनके अनुसार, जनता के बीच सक्रिय रहकर काम करने वाला नेतृत्व ही लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सकता है।
उन्होंने बहुजन समाज के विभिन्न संगठनों से अपील की कि वे व्यक्तिगत मतभेदों और आपसी खींचतान से ऊपर उठकर साझा राजनीतिक उद्देश्य के लिए एक मंच पर आएं। उन्होंने कहा कि बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में एकजुटता और बेहतर समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
मायावती के राजनीतिक संघर्ष का किया उल्लेख
लोकेश कटारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने संघर्ष के दम पर चार बार उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचकर बहुजन समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि बहुजन समाज से जुड़े विभिन्न संगठन आपसी समन्वय और सम्मान के साथ आगे बढ़ेंगे।
कटारिया ने कहा कि पिछले छह वर्षों के दौरान रहे मतभेदों को पीछे छोड़कर अब व्यापक सामाजिक और संगठनात्मक हितों को प्राथमिकता देने का समय है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मतभेदों के बजाय समाज के हितों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
इस दौरान उन्होंने एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद, विनय रत्न, कमल सिंह वालिया और महक सिंह सहित भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक एकजुटता से बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी को और मजबूत किया जा सकता है।
31 अक्टूबर की महारैली में भी शामिल होगी मेरठ मंडल की टीम
प्रेस वार्ता के दौरान लोकेश कटारिया ने 31 अक्टूबर को प्रस्तावित एक अन्य महारैली की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और हापुड़ से भावी प्रत्याशी वीरेंद्र शिरीष की ओर से किया जा रहा है। कटारिया के अनुसार, कार्यक्रम में एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में मेरठ मंडल की टीम भी इस कार्यक्रम में भाग लेगी। साथ ही कार्यकर्ताओं से दोनों आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की अपील की।
बहुजन संगठनों की एकजुटता पर रहेगा जोर
नेशनल भीम आर्मी की ओर से की गई इस घोषणा को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संगठन की ओर से आजाद समाज पार्टी को मजबूत करने, चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में काम करने और विलय की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है।
हालांकि, प्रस्तावित विलय की औपचारिक प्रक्रिया और उससे जुड़े संगठनात्मक फैसलों की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। फिलहाल संगठन का जोर कार्यकर्ताओं को लामबंद करने, आगामी महारैलियों में भागीदारी बढ़ाने और चुनाव से पहले बहुजन समाज की राजनीतिक एकजुटता को मजबूत करने पर है।
प्रेस वार्ता में नेशनल भीम आर्मी के पदाधिकारी, सदस्य और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

