लखनऊ: मदरसों में एक घंटा से ज़्यादा शिक्षा देने के फैसले पर मौलाना सुफियान निज़ामी ने नारजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड के ज़िम्मेदार अपने फैसले पर दोबारा बिचार करे। उन्होंने कहा कि मदरसा में पढ़ने वाले बच्चे और मदरसा में पढ़ाने वाले ज्यादा तर लोग मस्जिद में नमाज भी पढ़ेते है। ऐसे में तीन बजे तक पढ़ाई करने के जौहर की नमाज पढ़ने में दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चे मदरसे में रहे है और जौहर की नमाज के बाद खाने का भी इंतजाम करना होता है। उन्होंने कहा कि मगरिब की नमाज के बाद खाना खाना फिर पढ़ाई के लिए तैयार होना कही न कही दिक्कतों का सामना करना पढ़ सकता है। ऐसे में मदरसा बोर्ड को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए।

बता दें कि मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसों की समय सारिणी में बदलाव कर के छह घंटे तक शिक्षा देने का फैसला लिया है। मदरसा शिक्षा परिषद अध्यक्ष डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि योगी सरकार लगातार मदरसों को बेहतर व्यवस्था देने और शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। मदरसे के बच्चों के एक हाथ में लैपटॉप और एक हाथ में कुरान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए मदरसा शिक्षा परिषद ने यह कदम उठाया है। मदरसों में अनिवार्य रूप से सुबह 9 बजे दुआ के साथ राष्ट्रगान गाया जाएगा और दोपहर तीन बजे तक कक्षाएं संचालित करने का आदेश जारी किया गया है।
