बड़ौत के परमागम मंदिर में तीर्थंकरों के दर्शन से मिलती है अद्भुत शांति

बड़ौत के परमागम मंदिर में तीर्थंकरों के दर्शन से मिलती है अद्भुत शांति

बागपत।  उत्तर प्रदेश में बागपत के बड़ौत स्थित महावीर स्वामी दिगंबर जैन परमागम मंदिर में तीर्थकरों दर्शन से श्रद्धालुओं को अद्धुत शांति का अहसास होता है।
शहर के प्रमुख जैन मंदिरों मेें से एक परमागम मंदिर की मुख्य विशेषता यहां स्थापित मूलनायक महावीर भगवान की प्रतिमा है। गुजरात से लायी गई इस प्रतिमा का अतिशय अनुपम है। मान्यता है कि इनके दर्शन तथा पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
मंदिर के अध्यक्ष विनोद कुमार जैन एडवोकेट बताते हैं कि शहर के बड़ा जैन मंदिर से निकट तीरगिरान मोहल्ले में वर्ष 1994 में मंदिर की स्थापना की गई थी, जिसकी प्रतिष्ठा जयपुर से आए बाल ब्रह्मचारी पंडित जतीश शास्त्री ने कराई गई थी। मंदिर में जैन धर्म के दो हजार वर्ष पूर्व हुए दिगंबराचार्य कुंद-कुंद भगवान द्वारा रचित पंच परमागम समयसार, नियमसार, प्रवचन सार, पंचास्तिकाय, अष्ठपाहुड शास्त्रों का अध्यक्ष, पठन-पाठन नियमित रूप से होता है।
मूलनायक महावीर भगवान की प्रतिमा से अलग यहां अन्य चार भगवान की प्रतिमाएं हैं, जिनमें श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान, शांतिनाथ भगवान, चंद्रप्रभु भगवान, आदिनाथ भगवान की प्रतिमाएं शामिल हैं। सभी प्रतिमाओं का अतिशय आलौकिक है, जिनके दर्शन मात्र से आपार शांति व आनंद की अनुभूति हो जाती है।
मंदिर की स्थापना में सुखबीर सिंह जैन सर्राफ, सुभाष चंद जैन, प्रेमचंद जैन, सुखमाल चंद जैन, शिखरचंद जैन, प्रमोद जैन, नरेश चंद जैन आदि को ट्रस्टी बनाया गया, जिनकी देखरेख मेंं मंदिर व धर्मशाला के भवन का निर्माण कराया गया। मंदिर व धर्मशाला की भव्यता देखते ही बनती है।
मंदिर में दसलक्षण पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं। 10 दिनों तक प्रतिदिन जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, देवशास्त्र गुरु व दसलक्षण धर्म की पूजा भक्तिभाव की जाती है।

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