मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना स्थित सर्व ग्रामीण यूपी बैंक की शाखा से जुड़े कथित 15 से 16 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए किसान और व्यापारी बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, प्रभावित खाताधारकों को उनकी जमा पूंजी लौटाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का बैंक शाखा के बाहर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना 24वें दिन भी जारी रहा। डीएवी रोड स्थित बैंक शाखा के बाहर धरने पर बैठे भाकियू कार्यकर्ताओं ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए खाताधारकों की रकम तत्काल वापस करने की मांग उठाई।

मामले के अनुसार, सर्व ग्रामीण यूपी बैंक की बुढ़ाना शाखा में करीब 15 से 16 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आया था। आरोप है कि बैंक मैनेजर रूपक करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी के बाद फरार हो गया। इस मामले में बैंक की ओर से मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। घटना सामने आने के बाद से ही क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों में अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंता बनी हुई है। कई खाताधारकों की बड़ी रकम बैंक में अटकी होने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

24 दिन से बैंक के बाहर धरने पर बैठे हैं किसान
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ता प्रभावित किसानों और व्यापारियों की जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग को लेकर पिछले 24 दिनों से बैंक के बाहर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। संगठन के जिला महासचिव अनुज बालियान ने कहा कि किसान और व्यापारी अपनी मेहनत की कमाई इस भरोसे के साथ बैंक में जमा करते हैं कि जरूरत पड़ने पर उन्हें उनकी रकम आसानी से मिल सकेगी। लेकिन 15 से 16 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद खाताधारकों को अपनी ही जमा पूंजी पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भाकियू लगातार इस मामले को उठा रही है और बैंक प्रबंधन से समाधान की मांग कर रही है, लेकिन अभी तक किसी भी प्रभावित खाताधारक को उसकी रकम वापस नहीं मिली है। धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित लोगों को उनकी पूरी जमा पूंजी वापस नहीं मिल जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अनुज बालियान ने बताया कि मामले की जांच के लिए जांच टीम बैंक पहुंच चुकी है। संगठन को मिली जानकारी के अनुसार जांच पूरी हो चुकी है, इसके बावजूद खाताधारकों के भुगतान को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो किसानों और व्यापारियों की रकम लौटाने में देरी क्यों की जा रही है। उनका कहना है कि बैंक अपने बकाये की वसूली और उस पर ब्याज लेने में देरी नहीं करता, लेकिन खाताधारकों को उनकी जमा पूंजी लौटाने के मामले में लगातार इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि बैंक प्रबंधन भुगतान की प्रक्रिया और रकम वापस मिलने की संभावित तारीख के बारे में खाताधारकों को स्पष्ट जानकारी दे।
दिवाली और शादी के सीजन में बढ़ी खाताधारकों की परेशानी
धरने पर बैठे किसान नेताओं का कहना है कि दीपावली और शादी-विवाह का सीजन नजदीक होने के कारण प्रभावित परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। किसानों को खेती-किसानी से जुड़े भुगतान करने हैं तो व्यापारियों को अपने कारोबार की जरूरतें पूरी करनी हैं। वहीं, कई परिवारों में शादी-विवाह की तैयारियां भी चल रही हैं। ऐसे समय में बैंक में जमा रकम अटकी होने से लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
भाकियू नेताओं ने कहा कि खाताधारकों को अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है। बैंक प्रबंधन को त्योहार और पारिवारिक आयोजनों की जरूरतों को देखते हुए जल्द भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि प्रभावित किसानों और व्यापारियों को राहत मिल सके।
दो दिन का अल्टीमेटम, तालाबंदी की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन के जिला महासचिव अनुज बालियान ने बैंक प्रबंधन को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में खाताधारकों की रकम वापस करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और दिवाली से पहले भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन को पूरे जनपद में फैलाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में मुजफ्फरनगर जनपद में सर्व ग्रामीण यूपी बैंक की संबंधित शाखाओं पर भाकियू कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन करेंगे और तालाबंदी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 24 दिनों से चल रहा आंदोलन किसानों और व्यापारियों की जमा पूंजी वापस दिलाने के लिए है। जब तक प्रभावित खाताधारकों को उनकी पूरी रकम नहीं मिल जाती, संगठन पीछे नहीं हटेगा।
भाकियू ने बैंक प्रबंधन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने, जांच की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और भुगतान के लिए निश्चित समयसीमा तय करने की मांग भी की है। फिलहाल बैंक शाखा के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। अब देखना यह है कि बैंक प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित खाताधारकों की रकम लौटाने के लिए कब तक कोई ठोस निर्णय लेते हैं।

