उदयपुर। गेहूं के निर्यात पर पाबंदी लगाने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार की निंदा की है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में गेहूं की खरीद होती तो निर्यात पर पाबंदी लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर ‘गंभीर चिंता’ जताते हुए शनिवार को कहा कि वैश्विक और स्थानीय घटनाक्रमों के मद्देनजर यह जरूरी हो गया है कि उदारीकरण के 30 साल के बाद अब आर्थिक नीतियों को फिर से तय करने पर विचार किया जाए। पूर्व वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार से यह आग्रह भी किया कि राज्यों की खराब वित्तीय स्थिति के मद्देनजर माल एवं सेवा कर (GST) की क्षतिपूर्ति की मीयाद अगले तीन वर्षों के लिए और बढ़ा दी जाए। उन्होंने कहा कि अब केंद्र एवं राज्यों के राजकोषीय संबंधों की भी समग्र समीक्षा किए जाने की जरूरत है।

केंद्र सरकार के गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के फैसले को कांग्रेस ने किसान विरोधी बताया है। पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि निर्यात से किसानों को अच्छी कमाई हो सकती थी, परंतु सरकार ऐसा नहीं चाहती। इसी वजह से उसने यह किसान विरोधी कदम उठाया है।
चिदंबरम ने कहा कि महंगाई अस्वीकार्य स्तर पर पहुंच गई है और आगे भी इसके बढ़ते रहने की आशंका है। उनके मुताबिक, रोजगार की स्थिति कभी भी इतनी खराब नहीं रही, जितनी आज है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाकर और जीएसटी की उच्च दर रखने जैसी अपनी ‘गलत नीतियों’ से महंगाई की आग में घी डालने का काम कर रही है। चिदंबरम ने जीएसटी के बकाये का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्यों के बीच के राजकोषीय संबंधों की समग्र समीक्षा की जाए।
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई अस्वीकार्य स्तर तक पहुंच गई है। अपनी गलत नीतियों से सरकार महंगाई बढ़ा रही है। इनकी आर्थिक नीतियां देशहित में नहीं हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्यों की खराब हालात को देखते हुए उन्हें जीएसटी की क्षतिपूर्ति करने की मीयाद अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ा दी जाए जो आगामी 30 जून को खत्म हो रही है। एक सवाल के जवाब में पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि भारत सरकार महंगाई का ठीकरा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पर नहीं फोड़ सकती। महंगाई में बढ़ोतरी यूक्रेन युद्ध शुरू होने के पहले से हो रही है।

