प्रयागराज में मेडिकल साइंस की बड़ी कामयाबी! SRN में पहली बार हुई ब्रेन DSA, अब बिना बड़े चीरे के होगा एन्यूरिज्म का इलाज

प्रयागराज में मेडिकल साइंस की बड़ी कामयाबी! SRN में पहली बार हुई ब्रेन DSA, अब बिना बड़े चीरे के होगा एन्यूरिज्म का इलाज

प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने आधुनिक मस्तिष्क चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार मस्तिष्क की डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) सफलतापूर्वक की गई। इसके साथ ही अब मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के आधुनिक उपचार का रास्ता भी खुल गया है। जल्द ही ब्रेन एन्यूरिज्म के मरीजों को एंडोवेस्कुलर कॉइलिंग की सुविधा भी मिल सकेगी।

चिकित्सकों के अनुसार मस्तिष्क में अचानक होने वाले रक्तस्राव का एक प्रमुख कारण रक्त वाहिका में बनी गुब्बारे जैसी गांठ यानी एन्यूरिज्म का फटना है। इसके कारण मरीज को अचानक तेज सिरदर्द, उल्टी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवा और गंभीर स्थिति में बेहोशी तक हो सकती है। एन्यूरिज्म की पहचान के लिए सामान्यत: सीटी एंजियोग्राफी और जरूरत पड़ने पर डीएसए जांच की जाती है।

बिना बड़े चीरे के हो सकेगा उपचार

एसआरएन के न्यूरोसर्जरी विभाग में पिछले कई वर्षों से ब्रेन एन्यूरिज्म की सर्जरी की जा रही है। इसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिका पर बने एन्यूरिज्म को क्लिप लगाकर बंद किया जाता है। अब इसका आधुनिक विकल्प एंडोवेस्कुलर कॉइलिंग भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। इस तकनीक में जांघ या हाथ की रक्त वाहिका के रास्ते एक बहुत महीन नली (कैथेटर) को मस्तिष्क की संबंधित रक्त वाहिका तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद एन्यूरिज्म के भीतर विशेष प्रकार की कॉइल डालकर उसे रक्त के प्रवाह से अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया में सिर पर बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और उपयुक्त मरीजों में ठीक होने का समय भी अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

45 वर्षीय महिला की हुई पहली डीएसए

न्यूरोसर्जरी विभाग ने इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए नैनी निवासी 45 वर्षीय महिला की डीएसए जांच सफलतापूर्वक की। यह प्रक्रिया न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गुप्ता, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. अर्पित पाठक और डॉ. यतीश जोशी की टीम ने पूरी की। प्रक्रिया के बाद महिला की स्थिति स्थिर और सामान्य बताई गई है। चिकित्सकों के अनुसार उसे दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी देने की योजना है।

न्यूरोसर्जरी विभाग में अलग कैथ लैब उपलब्ध नहीं होने के कारण डीएसए की प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब में की गई। डीएसए सुविधा शुरू होने से ब्रेन एन्यूरिज्म के साथ ही मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी अन्य बीमारियों के आधुनिक उपचार की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

आसपास के मरीजों को मिलेगा लाभ

अब तक एंडोवेस्कुलर कॉइलिंग जैसी आधुनिक और महंगी चिकित्सा सुविधा मुख्य रूप से बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों और निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध रही है। एसआरएन में यह सुविधा शुरू होने से प्रयागराज के साथ कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, मिर्जापुर, वाराणसी और आसपास के अन्य जिलों के मरीजों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीजों को इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम होगी और अपेक्षाकृत कम खर्च में आधुनिक उपचार मिल सकेगा।

प्राचार्य ने टीम को दी बधाई

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ए.के. वर्मा ने न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एसआरएन अस्पताल में लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मस्तिष्क की डीएसए जांच शुरू होना न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एंडोवेस्कुलर तकनीक से ब्रेन एन्यूरिज्म के मरीजों का उपचार शुरू होने पर प्रयागराज और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

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