प्रयागराज का अद्भुत नागवासुकी मंदिर: जहां दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है तीर्थराज की यात्रा, सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
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प्रयागराज का अद्भुत नागवासुकी मंदिर: जहां दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है तीर्थराज की यात्रा, सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब

प्रयागराज। तीर्थराज प्रयागराज केवल त्रिवेणी संगम और अक्षयवट के लिए ही नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के परम भक्त नागराज वासुकी के विश्वविख्यात प्राचीन मंदिर के लिए भी विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि यह मंदिर आठ हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और संसार में नागराज वासुकी को समर्पित अपनी तरह का एकमात्र प्राचीन धाम है। श्रावण मास में यहां दर्शन-पूजन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

श्रावण के पवित्र महीने में मंदिर परिसर हर-हर महादेव और नागराज वासुकी के जयघोष से गूंज उठता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ नागराज वासुकी के दर्शन कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं।

मंदिर के पुजारी श्याम बिहारी मिश्र बताते हैं कि वह वर्षों से नागराज वासुकी की सेवा कर रहे हैं। उनके अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसका उल्लेख विभिन्न पुराणों में मिलता है। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग के शरीर पर गंभीर घाव हो गए थे। तब उन्होंने भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव से ऐसा स्थान बताने का अनुरोध किया, जहां उन्हें शांति और विश्राम मिल सके।

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने उन्हें तीर्थराज प्रयाग जाने का निर्देश दिया और कहा कि यहां प्रवाहित होने वाली पवित्र सरस्वती के प्रभाव से उन्हें शांति प्राप्त होगी। इसके बाद नागराज वासुकी प्रयाग आए और यहीं निवास करने लगे।

आगे चलकर जब भगवान ब्रह्मा ने प्रयाग में प्रथम यज्ञ किया, तब सभी देवी-देवता वहां उपस्थित हुए। यज्ञ समाप्त होने के बाद नागराज वासुकी ने अपनी भावना प्रकट की। तब भगवान शिव ने उन्हें प्रयाग के उत्तर दिशा में सर्वोच्च स्थान प्रदान किया और बारह माधव की परंपरा में विशेष सम्मान देते हुए आशीर्वाद दिया कि तीर्थराज प्रयाग आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाएगी, जब तक वे नागराज वासुकी के दर्शन और पूजन नहीं करेंगे।

इसी के साथ भगवान शिव ने यह वरदान भी दिया कि श्रावण मास में जो श्रद्धालु नागराज वासुकी की विधि-विधान से पूजा करेगा, उसे कालसर्प दोष से मुक्ति और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी। तभी से यह मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का प्रमुख केंद्र बन गया।

श्रावण मास में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु नागराज वासुकी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर में सुबह से देर शाम तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। मान्यता, इतिहास और आध्यात्मिक आभा से समृद्ध यह प्राचीन धाम आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है और तीर्थराज प्रयागराज की धार्मिक महिमा को और अधिक गौरवान्वित करता है।

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