पुलिस ने सहायक प्रोफेसरों, अध्यापकों व लाइब्रेरियनों पर भांजी लाठी, दौड़ा दौड़ाकर पीटा

सहायक व लाइब्रेरियन फ्रंट के पुरुष व महिला अध्यापक, लाइब्रेरियन व प्रोफेसर जब उच्च शिक्षा मंत्री मीत हेयर की रिहायश की तरफ बढ़ रहे थे तो पुलिस ने अध्यापकों, प्रोफेसरों व लाइब्रेरियनों पर जमकर लाठियां भांजी। यहां तक कि महिला अध्यापकों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया।

एक महिला अध्यापक पर जब लाठीचार्ज किया जा रहा था तो वह पुलिस कर्मियों को पूछ रही थी कि ये तो बताओ उनका कसूर क्या है। वह तो जहां नौकरी मांगने आए हैं। देखने को मिला कि पुलिस ने लाठीचार्ज और धक्केशाही से अध्यापकों की पगड़ियां उतार दीं और महिला अध्यापकों व लाइब्रेरियनों की चुनरियां उतार दीं और बेरहमी पीटा गया। लाठीचार्ज के दौरान पुलिस के डंडे तक टूट गए।

दिव्यांग अध्यापक भी पुलिस की मारपीट का बुरी तरह शिकार हो गए, लाठीचार्ज में कई पुलिस कर्मचारी भी जमीन पर गिर गए, पुलिस के लाठीचार्ज के बावजूद प्रदर्शनकारी राज्य की आप सरकर व उच्च शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे। अंत में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लाठीचार्ज कर वहां से खदेड़ दिया। इसके अलावा कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में हिरासत में लेकर विभिन्न थानों में ले गई और बंद कर दिए।

उच्च शिक्षा मंत्री मीत हेयर की रिहायश के सामने दिया धरना
बरनाला में हुए लाठीचार्ज से पहले सोमवार को 1158 सहायक प्रोफेसर व लाइब्रेरियन फ्रंट पंजाब, सरकारी कॉलेजों की ओर से भर्ती प्रक्रिया को बहाल करवाने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर की स्थानीय रिहायश के सामने रोष प्रदर्शन किया गया।

 

इस दौरान बरनाला चलो के नारे तले पंजाब के सभी जिलों से 1158 भर्ती में चुने हुए उम्मीदवार बड़ी संख्या में इस राज्य स्तरीय प्रदर्शन में शामिल हुए। फ्रंट के कन्वीनर डॉ. सुहेल ने बताया कि प्रदर्शन से सरकार से मांग है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1158 सहायक प्रोफेसरों व लाइब्रेरियन की भर्ती का इश्तिहार रद्द किए जाने पर लिखित फैसला आने के बाद बनी स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री के साथ पैनल मीटिंग करवाई जाए।

सरकार की ओर से बाकायदा प्रेस में एलान कर पूरी तैयारी से भर्ती रद्द करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में डबल बैंच में केस लड़ा जाए। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कॉलेजों में नियुक्त हो चुके सहायक प्रोफेसरों के रोजगार की सुरक्षा की गारंटी दी जाए। जिन उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुए हैं व जिनकी सिलेक्शन लिस्ट नहीं आई, उनके रोजगार का स्थायी प्रबंध करने के लिए हाईकोर्ट में गंभीरता से पैरवी की जाए और भर्ती को सिरे लगाया जाए।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *