परवाना में थाना गलत लिखने पर जेल से नहीं छूटा पीयूष जैन, अब ऐसे आएगा बाहर

कानपुर। इत्र कारोबारी पीयूष जैन के 250 दिन बाद जेल से बाहर आने में कागजी खानापूरी आड़े आ गई। बंधपत्रों का सत्यापन होने के बाद बुधवार को स्पेशल सीजेएम की कोर्ट से रिहाई परवाना जेल भेज दिया गया। परवाने में डीजीजीआई अहमदाबाद की जगह काकादेव थाना लिखा होने की वजह से बुधवार को इत्र कारोबारी जेल से नहीं छूट सका। अब गुरुवार को परवाना संशोधित कराने के लिए कोर्ट भेजा जाएगा। इसके बाद ही पीयूष सलाखों से बाहर आ सकेगा।

इत्र कारोबारी पीयूष जैन को बीती एक सितंबर को हाईकोर्ट से 196 करोड़ रुपये बरामदगी मामले में जमानत मिली थी। इस मामले में उसकी पत्नी कल्पना जैन और बेटा प्रियांश जैन ने दस-दस लाख रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपाजिट) बंधपत्र के रूप में दाखिल की थी। एफडी का सत्यापन होने के बाद बुधवार की शाम पीयूष को जेल से छोड़ने का परवाना जेल भेजा गया।

जेल अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय ने बताया कि चालान रिपोर्ट में डीजीजीआई अहमदाबाद लिखा था, जबकि रिहाई परवाने में थाने के कालम में काकादेव दर्ज था। दोनों में अंतर होने के कारण पीयूष की रिहाई नहीं की गई। गुरुवार को रिहाई परवाना संशोधन होने के बाद उसे रिहा किया जाएगा। पीयूष के आनंदपुरी स्थित घर और कन्नौज स्थित फर्म पर डीजीजीआई (महानिदेशालय जीएसटी इंटेलीजेंस) अहमदाबाद की टीम ने 196 करोड़ से अधिक रुपये, 23 किग्रा विदेशी मुहर लगा सोना और 600 लीटर चंदन का तेल बरामद किया था।

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