‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’, मुजफ्फरनगर में विवादित होर्डिंग पर सियासी घमासान, सपा ने पुलिस-प्रशासन से पूछा-कार्रवाई क्यों नहीं?

‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’, मुजफ्फरनगर में विवादित होर्डिंग पर सियासी घमासान, सपा ने पुलिस-प्रशासन से पूछा-कार्रवाई क्यों नहीं?

मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 के दंगों की कड़वी यादों से जुड़े संदेश ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ वाले विवादित होर्डिंग को लेकर मुजफ्फरनगर की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। शहर में लगाए गए इन होर्डिंग में सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं की तस्वीरें इस्तेमाल किए जाने के बाद समाजवादी पार्टी ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने आरोप लगाया है कि विवादित होर्डिंग ऐसे विज्ञापन स्थल पर लगाए गए, जिसे भाजपा के एक मंत्री के भाई से जुड़ा बताया जा रहा है।

सपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि यदि होर्डिंग में आपत्तिजनक या विवादित सामग्री थी और पुलिस-प्रशासन के संज्ञान में भी मामला आ चुका था, तो इसे लगवाने वाले लोगों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई की मांग की है।

विवाद उस समय और गहरा गया जब शहर के अलग-अलग स्थानों पर लगे होर्डिंग में विपक्षी नेताओं की तस्वीरें नजर आईं। होर्डिंग पर लिखा संदेश सीधे तौर पर वर्ष 2013 की घटनाओं की ओर इशारा करता दिखाई देता है। मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी के आसपास इस तरह के संदेश सामने आने से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

एसपी जिलाध्यक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

जिया चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आवास के आसपास भी विवादित होर्डिंग लगाए गए थे। उनका सवाल है कि जब पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में मामला पहुंच गया था, तब भी होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

सपा जिलाध्यक्ष के मुताबिक यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर नियमों के विपरीत या विवादित सामग्री वाला होर्डिंग लगाया गया था तो प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि उसे किसने तैयार कराया, किस व्यक्ति या संस्था ने लगवाया और इसके लिए किस स्तर से अनुमति ली गई। उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

भाजपा मंत्री के भाई से जुड़े विज्ञापन स्थल का आरोप

मामले को लेकर सपा जिलाध्यक्ष ने एक ऐसे विज्ञापन स्थल का भी जिक्र किया है, जिसे उन्होंने भाजपा के एक मंत्री के भाई से जुड़ा बताया है। उनका आरोप है कि इसी विज्ञापन स्थल पर विवादित होर्डिंग लगाए गए थे। इस आरोप के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

हालांकि विज्ञापन स्थल का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है, होर्डिंग लगाने की अनुमति किसने दी और इन्हें किस व्यक्ति अथवा संस्था ने लगवाया, इन सवालों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है। ऐसे में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होने तक इन्हें सपा जिलाध्यक्ष के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

2013 की यादों ने फिर गर्म किया सियासी माहौल

मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 के सांप्रदायिक दंगे जिले के इतिहास की बेहद संवेदनशील घटनाओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में दंगों की याद दिलाने वाला संदेश सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। सपा का आरोप है कि इस तरह की सामग्री पुराने जख्मों को कुरेदने और जिले के माहौल को प्रभावित करने का काम कर सकती है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन संवेदनशील घटनाओं से जुड़े संदेशों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने से पहले प्रशासन को नियमों और कानून-व्यवस्था के पहलू को गंभीरता से देखना चाहिए।

सपा ने मांगी निष्पक्ष जांच

जिया चौधरी ने प्रशासन से मांग की है कि विवादित होर्डिंग के मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में होर्डिंग तैयार कराने वाले, उन्हें लगवाने वाले, विज्ञापन एजेंसी और संबंधित विज्ञापन स्थल की भूमिका की पड़ताल किए जाने की मांग की गई है।

फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या किसी जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं सपा द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों की भी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

विवादित होर्डिंग के बहाने मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 की पुरानी घटनाएं एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। सपा की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के बाद अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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