धूप दशमी पर्व मनाया,श्री चोसठ रिद्धि विधान की पूजा की

बागपत। आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सुशिष्य,मुनि श्री विशुभ्र सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विश्वार्क सागर जी महाराज,के सानिध्य मे दसलक्षण पर्व के छटे दिन, धूप दशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया।

इस अवसर पर जैन श्रधालुओ ने भगवान को धूप समर्पित की। सुबह से ही मंदिर जी मे धूप खेने वालो का तांता लगा रहा। अजितनाथ सभागार, पांडुक्षिला मैदान के वातानुकूलित हॉल मे आज श्री चौसठ रिद्धि विधान का आयोजन किया गया और उत्तम संयम धर्म की पूजन की गयी। मुनि संघ के सानिध्य मे श्रधालुओ ने भगवान अजितनाथ की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र राजेश जैन व पारस जैन को प्राप्त हुआ। आज की पूजन मे देव शास्त्र गुरु, विद्यमान बीस तीर्थंकर एवं अनंतानंत सिद्ध परमेष्ठी भगवान की पूजन की गयी। सौधर्म इंद्र राजेश जैन द्वारा मंडल पर 128 अर्घ समर्पित किये। विधानाचार्य पंडित राजकिन्ग ने उत्तम संयम धर्म के संबंध मे सभी को विस्तार से समझाया और सभी को अपने जीवन मे संयम धारण करने के लिए प्रेरित किया। विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते हुए मुनि विशुभ्र सागर जी महाराज ने आज के धर्म उत्तम संयम धर्म के विषय मे बताया. उन्होंने कहा कि मनोबल को बढाने की अचुक औषधि संयम है. संयम धर्म के द्वारा साधक बे लगाम इंद्रिय और मन पर नियंत्रण रखता है. षट काय के जीवो की रक्षा करता है. उत्तम संयम धर्म मनुष्य को सामाजिक, नैतिक, धार्मिक एवं जिम्मेदार बनाता है। सभा मे सुभाष जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, राकेश जैन, सुधीर जैन, मनोज जैन, हंस कुमार जैन,अनिल जैन, अशोक जैन, आशीष जैन, संजय जैन, अंकुर जैन आदि उपस्थित थे। शाम 7 बजे से सभागार मे प्रतिक्रमण, आरती और उसके बाद जेएसवी एकेडमी के बच्चो द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. पुरस्कार वितरण संदीप जैन के द्वारा किया गया।

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