नयी दिल्ली। देश में मुद्रास्फीति आधारित थोक मूल्य सूचकांक पिछले महीने में घटकर 12.41 प्रतिशत पर आ गया जबकि जुलाई में यह 13.93 प्रतिशत था।

यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को दी।

थोक मूल्य सूचकांक में कमी के बावजूद यह समान्य से अधिक है और बीते 17 महीनों से दो अंकों में बना हुआ है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा,’ अगस्त, 2022 में मुद्रास्फीति में मुख्य रूप से खनिज तेलों, खाद्य पदार्थों, कच्चे पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस, बुनियादी धातुओं, रसायनों एवं रसायनिक उत्पादों, बिजली उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि का योगदान रहा है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह कीमतें नरम थी।’
थोक मूल्य सूचकांक उत्पादों के थोक मूल्यों की औसत गतिविधियों पर नजर रखता है और इसे अधिकतर सकल घरेलू उत्पाद के संकेतक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह केवल आधार मूल्यों की गणना करता है और इसमें कर, छूट या व्यापार छूट, परिवहन और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते हैं।
इस सप्ताह की शुरुआत में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में दर्शाया गया है कि खाद्य कीमतों में उछाल के कारण खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में सात प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
नीतियों पर नजर रखने वाले जानकारों और विशेषज्ञों ने पहले कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वैश्विक स्तर पर जिंसों के मूल्यों में नरमी से थोक मूल्य सूचकांक में गिरावट हो सकती है।
