डीजल, पेट्रोल, जेट ईंधन के निर्यात पर कर लगाया सरकार ने

नयी दिल्ली। सरकार ने डीजल और पेट्रोल के निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए इन ईंधनों के निर्यात पर उपकर लगा दिया है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया गया है और इसका घरेलू बाजार कीमतों पर असर नहीं पड़ेगा।

वित्त मंत्रालय के इस निर्णय के तहत अंतर्गत पेट्रोल के निर्यात पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर की दर से उपकर लगाया गया है। यह अतिरिक्त शुल्क इन ईंधनों के किसी भी निर्यात पर लागू होगा।

विमान ईंधन (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी 6 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त शुल्क (एसएईडी) लगाया गया है।

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन इस दौरान डीजल और पेट्रोल के भाव उससे भी तेजी से बढ़े हैं। मंत्रालय ने यह देखा है कि कुछ तेल शोधन इकाइयां घरेलू पेट्रोल पंपों को ईंधन देने की बजाय निर्यात को प्राथमिकता दे रही हैं क्यों कि उन्हें इसमें अधिक लाभ दिख रहा है।

मंत्रालय ने कहा है , “रिफाइनर इन उत्पादों का निर्यात विश्व स्तर की कीमतों पर निर्यात करते हैं,जो इस समय घरेलू कीमतों की तुलना में बहुत अधिक हैं। बयान में कहा गया है कि निर्यात अत्यधिक लाभकारी होने के चलते कुछ रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार में अपने पंपों को आपूर्ति कम कर रही हैं।”

मंत्रालय ने इसको देखते हुए पेट्रोल पर छह रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का उपकर लगाया है।

मंत्रालय का कहना है कि चूंकि निर्यात पर उपकर लगाया गया है, इसका डीजल और पेट्रोल की घरेलू खुदरा कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उपकर लगाने के अलावा, निर्यातकों को निर्यात के समय यह घोषित करने की आवश्यकता होगी कि शिपिंग बिल में उल्लिखित मात्रा का के 50 प्रतिशत के बाराबर ईंधन की चालू वित्तीय वर्ष के दौरान घरेलू बाजार में आपूर्ति कर दी गय है या की जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा, “इन उपायों से डीजल और पेट्रोल की घरेलू खुदरा कीमतों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस प्रकार, घरेलू खुदरा कीमतें अपरिवर्तित रहेंगी। साथ ही, इन उपायों से पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित होगी।”

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