बागपत। भारतीय किसान यूनियन के दिल्ली एनसीआर महासचिव प्रदीप धामा ने बताया की 15 दिन से किसान कलेक्ट्रेट पर अपनी जायज मांगों के साथ धरने पर बैठे हैं, पर शासन प्रशासन धनारत किसानो की सुध बुध नही ले रहा है। ये चिंताजनक विषय है।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर धरना देकर बैठे किसानो के साथ दिल्ली एनसीआर महासचिव प्रदीप धामा ने बताया कि मलकपुर चीनी मिल में किसानो के 4 सौ करोड़ रुपए बकाया में से प्रशासन द्वारा केवल 100 करोड़ रुपए का भुगतान किसानो को मंजूर नहीं है। अन्नदाता भूखों मरने के कगार पर खड़ा है। अपना पैसा चीनी मिलों पर बकाया होने के बावजूद किसान साहूकारों के ब्याज में दब गया है। ऊपर से आवारा पशुओं की रोकथाम करने में सरकार पूरी तरह विफल नज़र आ रही है। आए दिन आवारा पशु किसानो की फसल चट कर जाते है। सरकार ने आवारा पशुओं का तो कोई इंतजाम किया नही बल्कि किसान को फसल को आवारा पशुओं द्वारा चट करने के लिए खेत में तार लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। देश प्रदेश में विभिन्न पार्टियों की सरकार बनी है परंतु मौजूदा सरकार में सबसे ज्यादा किसानो की अनसुनी देखने को मिल रही है। यही कारण है की कलेक्ट्रेट पर 15 दिनो से बैठे किसानो की कोई सुध नहीं ले रहा है। बताया की यदि किसानो की ऐसे ही अनसुनी होती रही तो आने वाली 10 अक्टूबर में होने वाली महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन बड़े फैसले लेने को मजबूर होगी।
