करवाचौथ पर साध्वी प्राची का विवादित बयान, बोलीं- ‘जिहादियों से मेहंदी न लगवाएं’; सपा ने लगाया नफरत फैलाने का आरोप

करवाचौथ पर साध्वी प्राची का विवादित बयान, बोलीं- ‘जिहादियों से मेहंदी न लगवाएं’; सपा ने लगाया नफरत फैलाने का आरोप

मुजफ्फरनगर। करवाचौथ के त्योहार से पहले मुजफ्फरनगर में साध्वी प्राची के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शहर के प्रमुख शिव चौक पर पहुंचीं साध्वी प्राची ने हिंदू महिलाओं से करवाचौथ के अवसर पर मेहंदी लगवाने और खरीदारी करने को लेकर अपील की। इस दौरान उन्होंने मेहंदी लगाने वालों की धार्मिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं उन्हीं लोगों से मेहंदी लगवाएं, जो करवाचौथ मनाते हैं। उनके इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक आधार पर समाज को बांटने और नफरत को बढ़ावा देने वाली बयानबाजी बताया है।

साध्वी प्राची ने अपने संबोधन में करवाचौथ की तैयारियों के साथ स्वदेशी सामान खरीदने पर भी जोर दिया। हालांकि, उनके बयान में इस्तेमाल किए गए शब्दों और धर्म के आधार पर मेहंदी लगाने वालों को चुनने की अपील ने विवाद को जन्म दे दिया। अब इस मामले को लेकर धार्मिक पहचान, व्यक्तिगत पसंद, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

शिव चौक पर महिलाओं से की अपील

मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर साध्वी प्राची ने करवाचौथ की तैयारियों में जुटी महिलाओं से बातचीत करते हुए मेहंदी लगवाने और त्योहार से जुड़ी खरीदारी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे करवाचौथ के अवसर पर ऐसे लोगों से मेहंदी लगवाएं, जो स्वयं इस त्योहार को मनाते हैं।

इस दौरान उन्होंने कहा, ‘करवाचौथ पर जिहादियों से मेहंदी न लगवाएं, मेहंदी उनसे लगवाएं जो करवाचौथ मनाती हैं।’

उनकी इस टिप्पणी को धार्मिक पहचान के आधार पर मेहंदी लगाने वालों का चयन करने की अपील के रूप में देखा जा रहा है। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई। खास तौर पर उनके संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘जिहादी’ शब्द को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

करवाचौथ के अवसर पर मेहंदी लगवाना महिलाओं के श्रृंगार और त्योहार की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जाता है। इस दौरान बाजारों में मेहंदी लगाने वाले कारीगरों और दुकानदारों के पास ग्राहकों की भीड़ रहती है। ऐसे समय में साध्वी प्राची की टिप्पणी ने त्योहार से जुड़ी खरीदारी को धार्मिक पहचान के नजरिये से देखने की बहस को हवा दे दी है।

मेहंदी के बहाने उठाया ‘लव जिहाद’ का मुद्दा

साध्वी प्राची ने अपने बयान में कथित ‘लव जिहाद’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए धार्मिक पहचान से जुड़े लोगों से ही मेहंदी लगवाने की बात कही।

उनकी टिप्पणी में मेहंदी लगाने के काम को लेकर आशंका जताई गई, लेकिन उपलब्ध जानकारी में किसी विशिष्ट मेहंदी लगाने वाले व्यक्ति के खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण सामने नहीं आया है। न ही इस मामले में किसी विशेष घटना या शिकायत की पुष्टि उपलब्ध विवरण में की गई है।

ऐसे में कथित ‘लव जिहाद’ से जुड़ी बातों को साध्वी प्राची के आरोप और उनके व्यक्तिगत बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के धर्म या पेशे के आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक गतिविधि का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

साध्वी प्राची की अपील के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि त्योहारों के दौरान ग्राहकों को अपनी पसंद से सेवाएं लेने का अधिकार किस तरह सामाजिक और धार्मिक बहस का विषय बन जाता है। मेहंदी लगाने का पारंपरिक काम इस बार राजनीतिक बयानबाजी के कारण चर्चा में आ गया है।

समाजवादी पार्टी ने जताया विरोध, धार्मिक विभाजन का आरोप

साध्वी प्राची के बयान पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि धार्मिक पहचान के आधार पर इस तरह की बयानबाजी समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है।

सपा का कहना है कि त्योहारों का अवसर आपसी भाईचारे, सामाजिक मेलजोल और सौहार्द का संदेश देने के लिए होता है। ऐसे समय में किसी समुदाय के लोगों को धार्मिक आधार पर अलग करने वाली अपील से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरी बढ़ सकती है।

पार्टी ने इस तरह की टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रतिक्रिया देने वाले किसी विशिष्ट सपा नेता का नाम और उनका पूरा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इस मामले में सपा की प्रतिक्रिया का उल्लेख पार्टी की ओर से जताई गई आपत्ति और लगाए गए आरोपों के संदर्भ में किया जा रहा है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते रहे हैं। साध्वी प्राची की टिप्पणी और सपा की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों की भाषा तथा उनके सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

स्वदेशी सामान खरीदने पर भी दिया जोर

साध्वी प्राची ने अपने संबोधन में स्वदेशी सामान खरीदने की अपील भी की। उन्होंने महिलाओं से त्योहार की तैयारियों के दौरान स्थानीय और घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने की बात कही।

करवाचौथ के दौरान बाजारों में मेहंदी, चूड़ियां, साड़ी, श्रृंगार सामग्री, पूजा का सामान और अन्य वस्तुओं की खरीदारी होती है। त्योहार के नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और छोटे दुकानदारों से लेकर स्थानीय कारोबारियों तक को कारोबार बढ़ने की उम्मीद रहती है।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील अपने आप में एक अलग विषय है। लेकिन साध्वी प्राची के बयान में धार्मिक पहचान के आधार पर मेहंदी लगवाने की बात जुड़ने से मामला विवाद का रूप ले गया। आलोचना का प्रमुख आधार यही है कि किसी सेवा प्रदाता का चयन उसके काम, गुणवत्ता और ग्राहक की पसंद के बजाय धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में स्वदेशी खरीदारी की अपील और धार्मिक आधार पर मेहंदी लगाने वालों को चुनने की टिप्पणी के बीच अंतर करना भी जरूरी है। विवाद का केंद्र मुख्य रूप से बयान में इस्तेमाल की गई भाषा और उसके संभावित सामाजिक प्रभाव को लेकर है।

करवाचौथ की परंपरा के बीच धार्मिक पहचान पर बहस

करवाचौथ हिंदू समुदाय में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। परंपरागत रूप से इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। त्योहार से पहले महिलाएं कपड़ों, आभूषणों, चूड़ियों और श्रृंगार सामग्री की खरीदारी करती हैं। मेहंदी लगवाना भी इन तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

त्योहार के दौरान बाजारों में विभिन्न समुदायों के दुकानदार और कारीगर ग्राहकों को सेवाएं देते हैं। ऐसे में धार्मिक पहचान के आधार पर किसी सेवा को चुनने या किसी वर्ग से दूरी बनाने की अपील व्यापक सामाजिक चर्चा का विषय बन सकती है।

साध्वी प्राची के बयान को लेकर एक पक्ष इसे महिलाओं के लिए उनकी व्यक्तिगत अपील के रूप में देख सकता है, जबकि आलोचकों का कहना है कि ऐसी भाषा धार्मिक आधार पर भेदभाव की भावना को बढ़ा सकती है। यही विरोधाभास इस मामले को राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ले आया है।

मुजफ्फरनगर में बयान के बाद राजनीतिक चर्चा तेज

मुजफ्फरनगर के शिव चौक से सामने आए इस बयान ने करवाचौथ से पहले राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। साध्वी प्राची की टिप्पणी और समाजवादी पार्टी की आपत्ति के बाद मामला केवल त्योहार की तैयारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक पहचान, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक बयानबाजी के प्रभाव से भी जुड़ गया है।

इस घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। त्योहार आम तौर पर परिवारों, बाजारों और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का अवसर होते हैं, लेकिन विवादित टिप्पणियां इन्हीं अवसरों पर राजनीतिक और सामाजिक तनाव की चर्चा को बढ़ा सकती हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में साध्वी प्राची के बयान को लेकर किसी पुलिस कार्रवाई या औपचारिक शिकायत की पुष्टि नहीं है। ऐसे में इस पूरे मामले का केंद्र उनका बयान और उस पर समाजवादी पार्टी की ओर से जताई गई आपत्ति है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं या नहीं, इस पर नजर बनी रहेगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *