अमृत महोत्सव, होली और हुडदंग

आजादी की 75वीं वर्षगाँठ को सम्पूर्ण भारतवर्ष अमृत महोत्सव के रूप में अपने-अपने ढंग से मनाते हुए मस्ती में झूम रहा था और मस्ती भी ऐसी कुछ चन्द जयचन्दों को छोड़कर सभी देशवासी तिरंगे के रंगों में रंगे थे। सभी घरो, संस्थानों और भवनों पर तिरंगा लहराकर देश की आजादी का जश्न मनाते हुये, देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे।
आजादी के अमृत महोत्सव में रंगे उत्तर-प्रदेश के बागपत जनपद के गाँव किरठल के युवा विनित उर्फ शाहल्ड के नेतृत्व में स्वतंत्रता दिवस को अपने अलग और अनोखे ठंग से मना रहे थे। किरठल गाँव के लगभग 500 युवा अर्धनग्न अवस्था में लाल मिट्टी से होली खेलते हुए डीजे पर देशभक्ति के गीतों की धुन पर मस्ती और हुडदंग करते हुए तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे। कुछ युवा बुलडोजर पर खड़े थे, तो कुछ ट्रेक्टरों-ट्राॅलियों और कुछ पैदल भारत माता की जय, वन्देमातरम और देश के अमर शहीदों की जय बोलते हुए आगे बढ रहे थे। युवाओं के इस लम्बे काफिले में बुलडोजर, डीसीएम, डीजे, घोडा, और पैदल मार्च करने वाले किसी भी युवा ने काफिले से बाहर किसी अन्य व्यक्ति पर रंग नहीं डाला और न ही किसी के साथ कोई अभद्रता की। पुलिस सुरक्षा के बिना होली, हुडदंग के साथ तिरंगा यात्रा शान्ति पूर्वक सम्पन होना किसी आश्चर्य से कम नहीं था। यात्रा में पहुँचे समाजसेवी आर०आर०डी० उपाध्याय ने कहा मस्ती के साथ आजादी का जश्न मनाना ठीक है लेकिन अर्धनग्न होकर होली और हुडदंग के साथ तिरंगा यात्रा निकालना एक अच्छा संदेश नहीं है।
तिरंगा यात्रा में मुख्य रूप से विनित, उर्फ शाहल्ड़, डेविल फौजी, नितिन फौजी, जितेन्द्र डेरीवाले, आकाश, शंकर, अक्षय, आदित्य, गोलू, संजीव बोहरा, प्रधान, संदीप, राकेश जैन, समीर, साजिद, विकाश, कृष्ण प्रधान, विकाश बावरी, डॉक्टर अजीत, डॉक्टर राजकुमार, छोटा जैन, सागर जैन, अमल वर्मा आदि शामिल रहे।

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