लखनऊ/मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनावों के बाद समाजवादी पार्टी में संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में लखनऊ स्थित सपा प्रदेश मुख्यालय पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने लंबी बैठक की।

पूर्व सांसद कादिर राणा और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी एडवोकेट के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल के साथ अखिलेश यादव ने करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने जिले की राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से फीडबैक लिया।

बैठक में अखिलेश यादव ने नेताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब राजनीति केवल बैठकों और फोटो सेशन तक सीमित नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को जनता के बीच जाकर काम करना होगा और उनकी समस्याओं को सड़क से लेकर सदन तक उठाना होगा।
सपा प्रमुख ने पार्टी के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर जनता के बीच जाकर सक्रिय रूप से विरोध दर्ज कराने के निर्देश भी दिए।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि वे संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करेंगे और जिले की सभी विधानसभा सीटों पर जीत के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।
इस दौरान नेताओं ने दावा किया कि मुजफ्फरनगर में किसान, मजदूर, वकील, युवा और अल्पसंख्यक वर्ग सपा के साथ मजबूती से जुड़ रहा है और आने वाले चुनाव में पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी।
मुजफ्फरनगर को लेकर बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस जिले की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। अखिलेश यादव ने इसे प्रदेश की “सियासी प्रयोगशाला” बताते हुए कहा कि यहां की राजनीतिक दिशा पूरे राज्य के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है।
बैठक में कई वरिष्ठ और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिन्होंने संगठन की मौजूदा स्थिति और आगामी रणनीति को लेकर अपने सुझाव रखे। अंत में सभी नेताओं ने एकजुट होकर मिशन 2027 के लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प दोहराया।

