मंसूरी वेलफेयर फाउंडेशन ने छबील लगाकर प्यासों को पिलाया रुआब्जा

बागपत/दहा। गर्मी धीरे-धीरे परवान चढ़ रही है। मनुष्य व पशु-पक्षी प्यास से व्याकुल हो रहे हैं। इनकी प्यास बुझ भी जाए, लेकिन पानी के संसाधन खुद ही पानी मांग रहे हैं। कहीं हैंडपंप काम नहीं कर रहे हैं तो कहीं कुएं सूखे हैं। कहीं उनमें पानी है भी तो उसका पानी लाल दवा को तरस रहा है, जिसके चलते उसे पीया नहीं जा सकता।

गर्मी आरंभ होते ही शहर – गांव में सड़क के किनारे प्याऊ नजर आने लगते हैं। गांव पलड़ा में गेट स्थित बड़ौत – दिल्ली रोड पर मीठे पानी की छबील लगाई गई। बढ़ती गर्मी को देखते हुए। मंसूरी वेलफेयर फाउंडेशन ने अपनी क्षेत्रीय टीम को पूरे रोड पर संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने गाड़ी – ट्रक , मोटरसाइकिल सवार तथा राहगीरों को रोक – रोक कर मीठा शीतल जल पिलाया।

मंसूरी वेलफेयर फाउंडेशन के सह – कोषाध्यक्ष आबिद मंसूरी ने कहा कि दिल्ली – बडौत रोड स्थिति पलड़ा गांव के गेट पर मंसूरी समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने मीठे पानी की छबील लगाई। मंसूरी समाज के कार्यकर्ताओं के द्वारा सड़क से गुजरने वाले वाहनों को रोककर यात्रियों को ठंडा व मीठा पानी पिलाया। छबील सुबह से सांय तक जारी रही।

कहा कि इस बार पिछले वर्षों की भांति ज्यादा गर्मी है। जिसके चलते संगठन ने पहले ही मीठे पानी की छबील लगानी शुरू कर दी हैं। ऐसे कार्यक्रमों से समाज में एकता एवं भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है।

आबिद मंसूरी ने कहा कि इस चिल – चिलाती धूप में बार-बार पानी पिया जाना स्वाभाविक है। मनुष्य के साथ – साथ जब आप पक्षियों को पानी पिलाते हैं , तो ब्रह्मांड को यह संदेश पहुंचाता है कि आप दूसरों को कुछ देने के लिए समृद्ध और तैयार हैं। यह आपके घर की वृद्धि में वृद्धि करता है।

 

मंसूरी ने कहा कि हर व्यक्ति को गांवों में घरों के बाहर आम लोगों के लिए पानी के मटके और गिलास रख देने चाहिए। ताकि जो भी प्यासा राहगीर निकलता है, वह स्वेच्छा से मटके का पानी पीकर गला तर कर लेता है। आप चाहें, तो अपने स्तर पर इस परंपरा को बाकायदा जीवित रख सकते हैं, अपने घर के बाहर एक मटका रखकर, निःस्वार्थ सेवा का मन बनाएं। प्यास बुझाने वाला राहगीर आपको दुआएं ही देगा। मुहावरों में पानी पिलाने का अर्थ भले ही मजा चखाना होता हो, पर यह इस्लामिक सच है कि पानी पिलाना एक पुण्य (शवाब) का कार्य है। अच्छी भावना के साथ किसी प्यासे को पानी पिलाना तो और भी पुण्य का काम है।

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