उधारी के पैसे वापस ना मिलने से तंग किसान दंपत्ति भूख हड़ताल पर

शामली। कभी कभी नेकी का फल कड़वा भी होता है, इस कहावत को चरितार्थ करते हुये एक वाक्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में सामने आया है जहां एक किसान दंपत्ति ने गांव के ही एक व्यक्ति को बुरे हालात से उबारने के लिये बैंक से कर्ज लेकर मदद की मगर एवज में उसे शर्मिंदगी के साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है और अब स्थितियां इस कदर खराब हो चुकी है कि दंपत्ति को अपने पैसे वापस लेने के लिये भूख हड़ताल में बैठना पड़ा है।
दरअसल, शामली के झिंझाना क्षेत्र में एक किसान दंपत्ति ने बैंक से कर्ज लेकर पांच लाख रुपए गांव के एक व्यक्ति को दिए थे। एक साल गुजरने के बाद भी आरोपी व्यक्ति ने पैसा नहीं लौटाया जिससे परेशान किसान दंपत्ति भूख हड़ताल पर आरोपी की व्यक्ति के घर की दहलीज पर बैठे हैं। पीड़ित दंपत्ति ने सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल कर गुहार लगाई है कि गांव के लोग हमारी मदद करें । पीड़ित दंपत्ति का धरना दो दिन से जारी है लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी धरने से बेखबर हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस चौंकी चौसाना इलाके के गांव खोडसमा में यशवीर सिंह ने करीब एक वर्ष पूर्व पंजाब नेशनल बैंक चौसाना से कर्जा लेकर गांव के एक व्यक्ति को पांच लाख रुपए उधार दिए थे। समय बीतने के बाद यशवीर सिंह द्वारा पैसे की मांग की गई तो आरोप है कि आरोपी व्यक्ति ने टालमटोल कर दिया जिसके बाद गांव में पंचायत हुई तो आरोपी द्वारा पीड़ित किसान की बेटी की शादी में पैसे देने का वायदा किया गया। करीब एक महीने पूर्व यशवीर सिंह की बेटी की शादी हो चुकी है लेकिन आरोपी द्वारा पैसा वापस नहीं लौटाया गया ।
किसान दंपत्ति का आरोप है कि बेटी की शादी में कर्जा लेकर शादी में लगाया था लेकिन आरोपी व्यक्ति द्वारा हमारा पैसा नहीं लौटाया गया। मजबूर होकर पीड़ित दंपत्ति पिछले दो दिन से आरोपी व्यक्ति के घर की दहलीज पर धरने पर बैठे हैं। पीड़ित दंपत्ति ने सोमवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी है और सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल कर भूख हड़ताल में ही जान देने की चेतावनी की है। साथ ही गांव के सम्मानित लोगों से धरने में शामिल होने की गुहार लगाई है। दूसरी ओर दो दिन से धरना होने के बावजूद भी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। पीड़ित दंपत्ति के परिजनों ने बताया कि आरोपी आज सुबह अपनी पत्नी संग बाइक से फरार हो गया है।

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