वाराणसी। वाराणसी के ज्ञानवापी मंदिर मस्जिद मुद्दे को लेकर उत्तरप्रदेश की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। भले ही भाजपा इस मुद्दे को लेकर अभी भी प्रखंड नहीं है लेकिन विपक्ष ज्ञानवापी मामले को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर हमलावर है। इन सब के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने हिंदू आस्था को लेकर विवादित बयान दे दिया है। दरअसल, ज्ञानवापी मामले से जुड़े एक बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि हमारे हिंदू धर्म में यह है कि कहीं पर भी पत्थर रख दो, एक लाल झंडा रख दो, पीपल के पेड़ के नीचे तो मंदिर बन गया।

बुधवार को अयोध्या में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बनारस का मुद्दा जानबूझकर उठा रही है। बनारस के मुद्दे के पीछे बड़े-बड़े कारखाने बेचे जा रहे हैं। उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिस समय हम और आप टीवी पर अखबारों के माध्यम से गली और मोहल्ले के माध्यम से ज्ञानवापी मस्जिद का चर्चा कर रहे थे, उसी समय भारतीय जनता पार्टी ने एक योजना चलाई चलाई। अभी वह एक योजना चलाते थे वन नेशन वन राशन अब वह योजना चला रहे हैं वन नेशन वन उद्योगपति।

अखिलेश के इस बयान को लेकर यूपी की सियासत गर्मा गई है। बीजेपी ते प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बयान से लगता है कि उन्होंने चुनाव परिणाम से कोई सबक नहीं सीखा। हिन्दुओं को अपमानित करने वाला बयान है. समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण की पराकष्ठा तक जा चुकी है। यह वही समाजवादी पार्टी है जिसने कारसेवकों पर गोली चलवाने का काम किया। यह वही लाल टोपियों का गिरोह चलाने वाले समाजवादी पार्टी के लोग हिन्दुओं को अपमानित करने का काम कर रहे हैं। यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुंचाने वाली बातें हैं इससे समाज में विद्वेष पैदा होता है। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रह चुके हैं उनकी ऐसी भाषा स्वीकार नहीं होगी और उन्हें हिन्दुओं से माफ़ी मांगनी होगी।

