मिट्टी के बर्तनों पर भी महंगाई की पड़ गई है मार

मिट्टी के बर्तनों पर भी महंगाई की पड़ गई है मार

गुडग़ांव। बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों का असर मिट्टी के बर्तनों पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों की तुलना में सभी प्रकार के मिट्टी के बर्तनों के दामों में करीब 50 से 100 रुपए की वृद्धि हुई बताई जाती है। हालांकि गत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष मिट्टी के बर्तनों की मांग भी बढ़ गई है। कोरोना के बाद से लोगों का रुझान मिट्टी के बर्तनों की ओर बढ़ा है। मटका, सुराही व बोतल की मांग अधिक बढ़ी है।
लोगों का रुझान अपने दैनिक जीवन में मिट्टी के बर्तनों के इस्तेमाल के लिए बढ़ता दिखाई दे रहा है। मिट्टी का मयूर जग 250 से एक हजार रुपए के बीच मिल रहा है, जबकि पहले इसकी कीमत 150 रुपए से लेकर 700 रुपए थी। बोतल की कीमत भी 100 रुपए से 350 रुपए तक है। जिसमें एक लीटर से लेकर अढ़ाई लीटर तक की बोतलें शामिल हैं। पहले इन्हीं बोतलों के दाम 75 रुपए से 200
रुपए तक थे। साईबर सिटी का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बढ़ती गर्मी के साथ ठंडे पानी की तलब भी लोगों में बढ़ गई है। कोरोना ने फिर से रंग दिखाना शुरु कर दिया है, जिस पर चिकित्सक भी लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे फ्रिज के पानी से परहेज करेंगे और मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल अधिक करें। साईबर सिटी के गुडग़ांव महरौली रोड, ओल्ड दिल्ली रोड, खांडसा रोड, रेलवे रोड, सैक्टर 5 रोड, पालम विहार रोड, सैक्टर 4 व सुखराली सहित अन्य कई स्थानों पर मिट्टी के बर्तनों की खूब बिक्री हो रही है। लोगों का कहना है कि मटके के पानी का अलग ही स्वाद होता है। इन मटकों व घड़ों को स्टाईलिश रुप दिया जा रहा है। सुराही के बनाने में भी कलाकारी की गई है। मिट्टी के बर्तनों का कारोबार करने वालों का कहना है कि करीब-करीब 70 रुपए से 300 रुपए तक मटके व सुराही की बिक्री हो रही है। गर्मी के बढ़ जाने से इनकी मांग और अधिक बढ़ गई है। कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोग मिट्टी के बर्तनों में पानी रख रखे हैं। पक्षियों के लिए भी मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन बर्तनों में पक्षियों के लिए पानी भरकर रखा जा रहा है, ताकि वे भी अपनी प्यास बुझा सकें।

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