इंदौर में ठीक हो रहे दिल्ली और मुंबई के हार्ट पेशेंट, बड़ी संख्या में आ रहे यंगस्टर्स

इंदौर। शहर के एक निजी अस्पताल में हाल ही में शाजापुर के एक किसान को अस्थायी कृत्रिम हृदय से नया जीवन दिया गया। पांच बच्चों के इस पिता का हार्ट केवल 5% ही काम रहा था। मरीज के जिंदा रहने की संभावनाएं लगभग खत्म थीं। डॉक्टरों ने जिस पद्धति से इलाज किया उसे ‘एशिया-पेसेफिक’ इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में लाइव दिखाया गया। डॉक्टरों ने सबसे उन्नत लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस ‘इम्पेला’ का उपयोग कर उनकी जान बचाई।

इस तकनीक का सेंट्रल इंडिया में पहली बार उपयोग हुआ और मरीज को चौथे ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया। इस तरह के कई उदाहरण शहर में सामने आना आम बात हो गई है। इंदौर ने पिछले एक दशक में हृदय रोग के उपचार में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। दिल्ली-मुंबई से कई लोग हृदय रोग संबंधित उपचार के लिए अब इंदौर का रुख कर रहे हैं।

लापरवाही है घातक

सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अल्केश जैन का कहना है कि खाने-पीने में लापरवाही बरतने व समय पर हार्ट संबंधी तकलीफों के लक्षणों को नजरअंदाज करने से स्थितियां घातक हो रही हैं। कई मरीजों की तो मौत तक हो रही है।

हृदय रोग से जुड़ी विशेष बातें -डॉ. एडी भटनागर, सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट

– स्मोकिंग, जंक फूड व गलत खानपान से जितना जल्दी हो दूर हो जाएं

– 100 में से 3 युवा हृदय रोग के शिकार हो रहे हैं।

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