पहलवानी का शौक गोरखपुर के गरीब परिवार के एक युवक को भारी पड़ गया है। अखाड़े में दांव सीखने के दौरान उसका घुटना टूट गया। घुटने के अंदर का लिगामेंट फट गया है। इलाज में करीब डेढ़ लाख रुपये लगेंगे। युवा पहलवान की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इलाज पर इतना खर्च कर सके। लाचार पहलवान एक महीने से बिस्तर पर है। साहबगंज निवासी बजरंग अग्रहरी को पहलवानी का शौक लगा है। पांच साल से दुर्गाबाड़ी स्थित अखाड़े में रोजाना अभ्यास करता था। गद्दे पर प्रैक्टिस के लिए सैय्यद मोदी रेलवे स्टेडियम में अभ्यास करता था। उसके पिता ओमप्रकाश अग्रहरी सब्जी का ठेला लगाते हैं।

फट गया है घुटने का लिगामेंट
करीब एक महीने पूर्व दुर्गाबाड़ी स्थित अखाड़े में अभ्यास के दौरान बजरंग का घुटना टूट गया। इस दौरान उसका घुटने के अंदर का का लिगामेंट भी फट गया है। इसका इलाज महंगा होता है। इसके इलाज में लगने वाले स्क्रू और एंडोबटन महंगे मिलते हैं। इलाज में करीब सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए खर्च होते हैं। यह रकम बजरंग नहीं जुटा सका। ऐसे में वह बिस्तर पर आ गया है।

चंदा जुटाकर कराई एमआरआई
बजरंग ने बताया कि परिवार की माली हालत बेहद खराब है। पिता की कमाई से सिर्फ दो जून की रोटी का जुगाड़ हो पाता है। आय का कोई अन्य साधन नहीं है। इस वजह से इलाज नहीं करा पा रहा हूं। डॉक्टर ने एमआरआई कराने का परामर्श दिया तो उसके लिए भी रकम नहीं थी। अखाड़े के पहलवानों ने मदद की। उन्होंने चंदा जुटाया तब एमआरआई जांच हो सकी।
लगेंगे बायो-कम्पोजिट स्क्रू
बीआरडी मेडिकल कालेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि इस प्रकार के मरीजों के इलाज में आर्थोस्कोपिक सर्जरी करनी होती है। यह कैमरे की मदद की जाने वाली बारीक सर्जरी है। इसमें सबसे बड़ा खर्च बायो-कम्पोजिट स्क्रू और एंडोबटन का आता है। यह समय के साथ धीरे-धीरे गल जाता है। सिर्फ इस उपकरण की कीमत करीब 80 हजार रुपए है।