तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ का अधिवेशन सानंद सम्पन्न
चल रहे विद्वत् सम्मेलन के अन्तर्गत चतुर्थ दिवस आए हुए देश के विभिन्न अंचलों से सभी विद्वानों के द्वारा आलेख वाचन की प्रक्रिया सम्पन्न की गई, जिसमें मुख्य विषय अयोध्या तीर्थ था

चल रहे विद्वत् सम्मेलन के अन्तर्गत चतुर्थ दिवस आए हुए देश के विभिन्न अंचलों से सभी विद्वानों के द्वारा आलेख वाचन की प्रक्रिया सम्पन्न की गई, जिसमें मुख्य विषय अयोध्या तीर्थ था। वर्तमान चैबीसी के 5 तीर्थंकरों ने शाश्वत तीर्थ अयोध्या में जन्म लिया एवं उनके जन्मस्थान के विकास को लेकर इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया था, जिसमें तीर्थ विकास के प्रत्येक पहलुओं पर चर्चा की गई। सारे देश से लगभग 125 विद्वान संगोष्ठी में सम्मिलित हुए एवं जैन मंत्र एक अध्ययन को लेकर भी संगोष्ठी में कुछ विद्वानों ने मंत्र साधना के ऊपर भी अपने आलेखों का वाचन किया एवं लोहारिया से पधारे डाॅ. सोहनलाल जी देवोत द्वारा मंत्रसाधना एक अध्ययन नामक पुस्तक लिखी गयी, जिसमें उन्होंने जैन मंत्र साधना का विस्तृत विवेचन किया एवं उस पुस्तक के लेखन में मंत्र साधना के द्वारा हर कार्य संभव है एवं प्रत्येक कार्य के दो पहलु हैं उपयोग एवं दुरुपयोग। इस विषय पर डाॅ. सोहनलाल देवोत ने प्रकाश डाला।
संस्थान के मंत्री श्री विजय कुमार जैन ने बताया कि डाॅ. सोहनलाल देवोत के इस पुस्तक के लेखन कार्य के लिए उन्हें तीर्थंकर ऋशभदेव जैन विद्वत् महासंघ के द्वारा उन्हें प्रशस्ति देकर सम्मान किया गया एवं जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंत्र साधना गुरु के सान्निध्य में ही होनी चाहिए। क्योंकि लोग इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हैं, जिसके कारणवश वह भटक जाते हैं, पागल हो जाते हैं एवं स्वयं के जीवन को समाप्त कर लेते हैं। यंत्र साधना से व्यक्ति उच्च शिखर पर पहुंच सकता है, लेकिन बिना किसी लालच के और पूर्ण समर्पण के साथ की गई साधना उच्च शिखर पर ले जाती है। इसी श्रृंखला में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने आए हुए सभी विद्वानों को कहा कि वो देश के विभिन्न अंचलों में धर्म के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाएं, जिससे समाज में सदाचार एवं धार्मिक वातावरण बना रहे। पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने आए हुए सभी विद्वानों का सम्मान अंग वस्त्र एवं पूजन के वस्त्र देकर किया। महिलाओं को सम्मानस्वरूप साड़िया भेंट की गई। पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने सभी विद्वानों के लिए खूब-खूब मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। संस्थान के महामंत्री श्री अनिल कुमार जैन ने सभी के लिए अपनी शुभकामना प्रेषित की। इस अवसर पर डाॅ. सोहनलाल देवोत के परिवार के लगभग 100 लोग उपस्थित रहे। डाॅ. देवोत ने साढ़े आठ वर्ष बाद अपना मौन तोड़कर माताजी के सान्निध्य में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया और अपनी मंत्र साधना और पुस्तक लेखन के विषय में प्रकाश डाला।
सायंकालीन सत्र शेष सभी विद्वानों ने अपने-अपने आलेखों का वाचन किया एवं लखनऊ से पधारीं श्रीमती सुनयना जैन, अध्यक्ष-अवध प्रान्तीय गणिनी ज्ञानमती भक्त मण्डल-लखनऊ ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ के अध्यक्ष ने अपना अध्यक्षीय उद्बोधन इस अवसर पर सभी को प्रदान किया एवं महामंत्री श्री विजय कुमार जैन ने इस अवसर पर सभी का संस्थान परिवार की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया एवं विधिवत् संगोष्ठी के समापन की घोषणा की।


