बागपत। गरीब मजदूरों किसानों ने जो आवास तालाबों के निकट मजबूरी में छत विहीन होने के कारण अपने गुजर बसर के लिए 2-2 पैसे जोड़कर किसी तरह तैयार किये थे , भाजपा की योगी सरकार उन्हें ध्वस्त करने पर आमादा है।
जहां तक अवैध निर्माण के तर्कों का सवाल है तो उत्तर प्रदेश में शायद ही कोई गांव ऐसा होगा जहां गरीबों के आवास पूर्व में खाली पड़ी और अनुपयोगी जमीनों पर न बनाये गए हों।
इन आवासों में अनेक आवास ऐसे भी हैं जो समय समय पर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्राप्त सहायता राशि से बने हैं।
सिनौली गांव के ये तकरीबन 50-55 घर न तो सड़क विस्तारीकरण में बाधक हैं और न ही पुरातत्व विभाग की किसी योजना के अंतर्गत आते हैं। सरकार के लिए यदि किसी विकास परियोजना के उक्त जमीनों की आवश्यकता है तो सरकार पहले प्रभावित लोगों के वैकल्पिक आवासों की व्यवस्था सुनिश्चित कराये और बाद में यदि आवश्यक समझे तो ध्वस्तिकरन की कार्यवाही कर् सकती है। सभी नागरिकों को छत और आवास उपलब्ध कराने का दायित्व सरकार का है।
नागरिकों को छत विहीन करना न तो मानवीय दृष्टि से ही उचित ठहराया जा सकता है और न ही संवैधानिक दृष्टि से यह उचित है। यदि योगी जी का निरंकुश बुलडोजर गरीबों के आवासों पर चलेगा तो जाहिर है अपना आशियाना गंवाने वाले लोग और ग्रामीण समाज इसका पुरजोर विरोध करेगा।
आज पूरे गांव में मातम के हालात नज़र आ रहे हैं और गांव वाले योगी सरकार की इस गैर लोकतांत्रिक संभावित कार्यवाही से स्तब्ध हैं। युवा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नीता पहलवान के आवास पर आगे की रणनीति तैयार करते पूर्व जिला पंचायत प्रत्याशी सोनू प्रधान जी क्षेत्रीय महासचिव बबली तोमर जी सुरेंद्र मुखिया जी एडवोकेट नरेंद्र मान जी प्रमोद पूनिया जी सभी सम्मानित ग्रामवासी उपस्थित हुवे।
