शहडोल. शहर की सीमा में भारी वाहनों के प्रवेश पर अंकुश लगाने, हादसों व यातायात दबाव कम करने सोहागपुर थाना से बाईपास मार्ग निकाला गया है। यही बाईपास मार्ग अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। बे-रोक-टोक फर्राटे भरते वाहनों के साथ ही भारी वाहनों की धमाचौकड़ी जानलेवा साबित हो रही है। जबकि इस मार्ग के किनारे-किनारे जहां बसाहट बढ़ती जा रही है वहीं मेडिकल कॉलेज भी इसी मार्ग पर पड़ता है। इस बीच न तो सुरक्षा के लिहाज से कोई इंतजामात है और न ही शाम के बाद इस मार्ग में प्रकाश की कोई व्यवस्था है। घुप्प अंधेरे के बीच भारी वाहनों की चकाचौंध कर देने वाली रोशनी जहां छोटे वाहन चालकों को विचलित करती है वहीं वाहनों की रफ्तार हादसों की वजह बन रही है। जिस पर अंकुश लगाने कोई इंतजामात नहीं है। जबकि यह बाईपास शहर की सीमा से लगे क्षेत्रों से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों की माने तो ऐसे चिन्हित स्थानों में कर्व बढ़ाकर व इमरजेंसी व्यवस्था के तौर पर एनएच प्रबंधन लाइटिंग की व्यवस्था करा सकता है। जिससे कि हादसों को नियंत्रित किया जा सके।
पांच किलोमीटर के बीच तीन गंभीर स्पॉट
राजाबाग से किया मोटर्स के बीच तीन ऐसे प्वाइंट हैं जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। राजाबाग के समीप ओवर ब्रिज अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। ऐेसे में उसके अगल-बगल से भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है जहां सुरक्षा के कोई इंतजामात नहीं है। वहां से आगे नगर से मेडिकल कॉलेज जाने वाले वाहन बाईपास क्रास करके गुजरते हैं। इस चौराहे में भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे कि वाहनों की स्पीड पर अंकुश लगाया जा सके। जबकि यहां से कुछ दूर पर ही मोड भी है जिससे बुढ़ार तरफ से आने वाले वाहन नजर नहीं आते। वहीं बाईपास से पुराने मार्ग को जोडऩे वाले तिराहे में भी समुचित व्यवस्था नहीं है। यह तीनो प्वाइन्ट कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
शाम होते ही छा जाता है अंधेरा, पुलिस की रात्रि गश्त भी नहीं
इस बाईपास मार्ग में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। शहर की सीमा के पास से गुजरने के साथ ही मेडिकल कॉलेज होने की वजह से रात्रि में भी लोगों को आना जाना बना रहता है। इसके साथ ही इस मार्ग के किनारे-किनारे बसाहट भी है। ऐसे में शाम के बाद इस पूरे मार्ग में अंधेरा छाया रहता है। अचानक वाहनों के आ जाने की वजह से कभी भी हादसा हो सकता है। वहीं मेडिकल कॉलेज आने-जाने वाले मार्ग में अपराधिक घटनाओं की संभावनाएं भी बढ़ गई है। जबकि इस मार्ग में पुलिस की रात्रि गश्त भी नहीं होती है। वहीं बाईपास मार्ग में जानवरों का डेरा भी रहता है। यह जानवर भी हादसे का कारण बन रहे हैं।
कार ने चिकित्सक को मारी ठोकर, हालत नाजुक
कोविड के दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं देने वाले दंत चिकित्सक डॉ अंकित तिवारी इसी मार्ग में बीती रात हादसे का शिकार हो गए। जिनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बीती रात वह मेडिकल कॉलेज तिराहा के पास से अपनी बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने बाइक को ठोकर मार दी। हादसे में डॉ अंकित तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हे इलाज के लिए रायपुर ले जाया गया है। जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इसके पूर्व यहां सरिया लोड ट्रक के साथ ही एक कार भी दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी है। जबकि छुट-पुट घटनाएं आए दिन होती रहती हैं।
इनका कहना है
नेशनल हाईवे में स्पीड ब्रेकर के साथ लाइटिंग का कोई प्रोवीजन नहीं है। स्थानीय नगरीय निकाय लाइटिंग की व्यवस्था कर सकती है। मेडिकल कॉलेज आने-जाने वाले मार्ग में स्पीड ब्रेकर बनाया है। नगर से मेडिकल कॉलेज जाने वाले मार्ग में आवागमन करने वाले वाहनों की स्पीड कम की जा सके।

