इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश होने से जंगल व खेतों में पानी भरने से अजगर भटक गए हैं और वे आबादी क्षेत्र में आकर घरों में मिलने लगे हैं। इन दिनों अजगर घरों व गाडिय़ों में अपना ठिकाना बना रहे हैं। पानी भरने से अजगर भोजन के लिए इधर से उधर घूमते हुए आबादी क्षेत्र में आ रहा है। पिछले साल की ही बात करें तो रेस्क्यू करने वाली टीमों ने खेतों में अजगर ही अजगर पकड़े थे, लेकिन इस बार ये अजगर घरों में पकड़े जा रहे हैं। खेतों में अजगर अपने भोजन के लिए जाते हैं और वहीं किसानों की सूचना पर रेस्क्यू करना आम था। इस बार हुई बारिश के बाद वहां अजगर नहीं मिले क्योंकि वहां उनको मिलने वाला भोजन भी उपलब्ध नहीं था और भटकते हुए आबादी क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। अभी तक उदयपुर शहर में ही करीब 15 से ज्यादा अजगर अलग-अलग टीमों ने रेस्क्यू किए है।

अजगर जिनका भोजन करता वे भी वहां से निकल गए
अजगर खेतों में जिनका भोजन करता है वह भी जंगल व खेतों में पानी होने से वहां से निकल गए है। वन्यजीव प्रेमी डाॅ. सतीश कुमार शर्मा कहते हैं कि सामान्यत: अजगर चूहों, खरगोश, सियार, नेवले आदि का शिकार करता है। ये सब अभी सूखे की तरफ चले गए क्योंकि नीचे नमी वाला इलाका है। ऐसे में वहां अब भोजन रहा ही नहीं है। अजगर को आबादी क्षेत्र में कुत्ते, लंगूर आदि मिल जाते हैं तो वह तलाश करता रहता है और बाकी जहां जगह मिलती है वहां घर ठहर जाता है। वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर अध्यक्ष चमन सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने गत वर्ष खेतों में किसानों की सूचना पर अजगर पकडऩे के रेस्क्यू ज्यादा किए थे, लेकिन इस आबादी क्षेत्र से ऐसे केस ज्यादा आ रहे हैं।

केस 1
कलड़वास में एक फैक्ट्री में तीसरी मंजिल पर स्थित ऑफिस में अजगर मिला। वहां जैसे ही ऊपर स्टाफ पहुंच सफाई कर रहे थे तब ऑफिस में मिला।
केस 2
एकलिंगढ़ छावनी में एक कैंटर में सीट के नीचे अजगर मिला। जैसे ही फाटक खोली तो अजगर नजर आया, बाद में उसे रेस्क्यू किया।
केस 3
शहर के पास लखावली में एक स्वीमिंग पूल में एक अजगर मिला। जैसे ही वहां स्टाफ पहुंचा तो अजगर दिखा।