उत्तराखंड में दो कानून के अध्ययन और परीक्षण के लिए एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी है। रिपोर्ट के बाद पुष्कर सिंह धामी ने साफ तौर पर कहा है कि उत्तराखंड में किसी भी जमीन का दुरुपयोग नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से भू-कानून को लेकर चर्चा हो रही है, इसके लिए हमने एक कमेटी बनाई थी, कमेटी ने कल एक रिपोर्ट दी है, जिसमें कई सिफारिश की गई है। रिपोर्ट का अध्य्यन कर हम उसे अपनी कैबिनेट में रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड की जमीन का दुरुपयोग नही होगा और ना ही हम निवेशकों को यहां आने से रोकेंगे।

आपको बता दें कि कमेटी अपनी रिपोर्ट में 23 सिफारिशें की हैं। मुख्यमंत्री ने सिफारिशों पर विचार करते हुए कहा कि राज्य सरकार भूमि कानून में संशोधन करेगी। रिपोर्ट में नदी नालों तथा सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कठोर दंड का भी प्रावधान करने को कहा गया है। इसके साथ ही इस कमेटी ने कुछ बड़े कामों को छोड़कर अन्य के लिए भूमि क्रय के स्थान पर दिल्ली पर देने की बात की है। साथ ही साथ परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड राजस्व अभिलेखों से भी जोड़ने की सिफारिश की गई है। आपको बता दें कि इस समिति में 5 सदस्य थे जिसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार कर रहे थे। उत्तराखंड में चुनाव बाद दोबारा मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद धामी ने वह कानून के अध्ययन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।

वर्तमान समय में देखें तो उत्तराखंड में कोई भी व्यक्ति स्वयं या अपने परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर बिना अनुमति के अपने जीवन काल में अधिकतम 250 वर्ग मीटर भूमि ही आवासीय प्रयोजन हेतु खरीद सकता है। यही कारण है कि समिति ने इस बात की सिफारिश की है कि परिवार के सभी सदस्यों के नाम से अलग-अलग भूमि खरीद पर रोक लगाने के लिए सभी सदस्यों के आधार कार्ड राजस्व अभिलेखों से जोड़ दिया जाए। इसके अलावा प्रदेश में बन्दोबस्त की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की सिफारिश की गयी है तथा कहा गया है कि धार्मिक प्रयोजन हेतु कोई भूमि क्रय या निर्माण किया जाता है, तो अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से निर्णय लिया जाए।